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Holashtak 2021: 21 मार्च से होलाष्टक आरंभ, जानिए इन आठ दिनों को क्यों माना गया है अशुभ
Mon, 15 Mar 2021 07:39 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 15 Mar 2021 07:39 AM IST
सार
- इस वर्ष 21 मार्च से होलाष्टक प्रारंभ हो रहे हैं।
- होली के पहले 8 दिन को शुभ नहीं माना जाता है।
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होलाष्टक 2021: होली के आठ दिन पहले होलाष्टक शुरू हो जाते हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शास्त्रों में होली के पहले 8 दिन को शुभ नहीं माना जाता है। होली के आठ दिन पहले होलाष्टक शुरू हो जाते हैं। होलाष्टक के दौरान किसी भी तरह के मांगलिक और शुभ कार्य को करना वर्जित माना गया है। फिर होलिका दहन के बाद होलाष्टक का समय सामाप्त हो जाता है। इस वर्ष होली 29 मार्च को खेली जाएगी और उसके पहले 21 मार्च से होलाष्टक शुरू हो जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू हो जाते हैं।
होलाष्टक क्यों है अशुभ
होलाष्टक के बारे में पौराणिक मान्यता है कि दैत्य हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र और भगवान विष्णु के अनन्य भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से क्रोधित होकर होली से पहले आठ दिनों में प्रह्लाद को अनेकों प्रकार के कष्ट दिए थे। इन 8 दिनों में भक्त प्रह्लाद को कई तरह की यातनाएं थी,लेकिन भक्त प्रह्लाद ने इस दौरान विष्णु भक्ति नहीं छोड़ी। तभी से भक्ति पर प्रहार के इन आठ दिनों को हिन्दू धर्म में अशुभ माना गया है। भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की भी सहायता ली। होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह कभी भी अग्नि से नहीं जलेगी।
होलाष्टक में ये कार्य वर्जित माने गए हैं।
होलाष्टक के दौरान विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, जमीन का सौदा, नामकरण एवं विद्यारंभ आदि सभी मांगलिक कार्य शास्त्रों के अनुसार वर्जित माना गया है। होलाष्टक के दौरान व्रत, पूजन और हवन की दृष्टि से अच्छा समय माना गया है। इन दिनों में किए गए दान से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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होलाष्टक और ज्योतिषीय प्रभाव
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन माह में होली के कुछ दिनों पहले सभी ग्रह और नक्षत्र अशुभ स्थिति में पहुंच जाते हैं जिस कारण से चारो तरफ काफी मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा फैल जाती है। जिस कारण से होलाष्टक आरंभ होने लेकर इसके सामाप्त होने तक कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। इस वर्ष 22 मार्च से होलाष्टक प्रारंभ हो रहे हैं।
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होलाष्टक क्यों है अशुभ
होलाष्टक के बारे में पौराणिक मान्यता है कि दैत्य हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र और भगवान विष्णु के अनन्य भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से क्रोधित होकर होली से पहले आठ दिनों में प्रह्लाद को अनेकों प्रकार के कष्ट दिए थे। इन 8 दिनों में भक्त प्रह्लाद को कई तरह की यातनाएं थी,लेकिन भक्त प्रह्लाद ने इस दौरान विष्णु भक्ति नहीं छोड़ी। तभी से भक्ति पर प्रहार के इन आठ दिनों को हिन्दू धर्म में अशुभ माना गया है। भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की भी सहायता ली। होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह कभी भी अग्नि से नहीं जलेगी।
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होलाष्टक में ये कार्य वर्जित माने गए हैं।
होलाष्टक के दौरान विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, जमीन का सौदा, नामकरण एवं विद्यारंभ आदि सभी मांगलिक कार्य शास्त्रों के अनुसार वर्जित माना गया है। होलाष्टक के दौरान व्रत, पूजन और हवन की दृष्टि से अच्छा समय माना गया है। इन दिनों में किए गए दान से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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होलाष्टक और ज्योतिषीय प्रभाव
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन माह में होली के कुछ दिनों पहले सभी ग्रह और नक्षत्र अशुभ स्थिति में पहुंच जाते हैं जिस कारण से चारो तरफ काफी मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा फैल जाती है। जिस कारण से होलाष्टक आरंभ होने लेकर इसके सामाप्त होने तक कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। इस वर्ष 22 मार्च से होलाष्टक प्रारंभ हो रहे हैं।