फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   hindu vrat festival celebrated according to tithi Know the reason why some festivals celebrated for two days

Hindu Vrat Tyohar: हिंदू व्रत-त्योहार दो दिन क्यों बताए जाते हैं? जानिए इसके पीछे का कारण

Tue, 16 Aug 2022 09:16 AM IST
विनोद शुक्ला मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषविद्, चंडीगढ़
मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषविद्, चंडीगढ़ Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 16 Aug 2022 09:16 AM IST
सार

श्रीमद्भागवत,श्री विष्णुपुराण,वायुपुराण,अग्नि पुराण,भविष्यपुराण,सकंदपुराण,धर्मसिन्धु,निर्णयसिंन्धु आदि में पर्वों के निर्धारण के लिए बहुत से नियम दिए हैं,जिन्हें ध्यान में रखकर ही किसी त्योहार की बारीकी से तिथि और समय निर्धारित किए जाते हैं।

विज्ञापन
hindu vrat festival celebrated according to tithi Know the reason why some festivals celebrated for two days
भारतीय ज्योतिष चंद्रमा की गति पर आधारित है और उसी के आधार पर कई युगों से पर्वों की तिथियां निकाली जाती हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अक्सर धर्मगुरुओं,ज्योतिषाचार्यों,पंचागकर्ताओं पर त्योहारों ,पर्वों,उत्सवों की तिथियां बताने और हर उत्सव को दो दिन मनाने या उसके समय निर्धारण को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न करने के आरोप लगाए जा रहे हैं और ज्योतिषियों को एकमत होने की सलाह दी जा रही है ताकि जनसाधारण भ्रमित न हो और हिंदू धर्म का उपहास न हो।
विज्ञापन


कई बार रक्षाबंधन,जन्माष्टमी या कई उत्सवों की दो तारीखें या भिन्न भिन्न समय निर्धारित कर दिए जाते हैं। ऐसा क्यों होता है और समाधान क्या है?
विज्ञापन
  • भारतीय ज्योतिष आदिकाल से गणना के मामले में पूरे विश्व में अग्रणीय रहा है। जब बाकी देशों को यह तक मालूम नहीं था कि पृथ्वी गोल है या चपटी,सूर्य घूमता है या धरती,आकाश में कितने नक्षत्र हैं,भारतीय गणित कहीं आगे था। धरती से सूर्य की दूरी पश्चिमी देशों को मालूम नहीं थी,उत्तरायण दक्षिणायन का बोध नहीं था,महाभारत काल में हमारे ज्योतिषाचार्याों ने यह बता दिया था कि किस दिन कुरुक्षेत्र में पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा और दिन में घना अंधेरा छा जाएगा। इसी गणना के आधार पर भगवान कृष्ण ने अंधेरे का लाभ उठाकर जयद्रथ का वध करवा दिया था।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • भारतीय ज्योतिष चंद्रमा की गति पर आधारित है और उसी के आधार पर कई युगों से पर्वों की तिथियां निकाली जाती हैं। होली पूर्णमासी पर ही मनाई जाएगी और दीवाली अमावस पर ही। जैसे स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त और गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को ही मनाए जाएंगे। ऐसे ही वैदिक ज्योतिष में गणनाओं के आधार हमारे प्राचीन ग्रंथ हैं जिनके नियमानुसार किसी भी त्योहार की तिथि व समय निर्धारित की जाती है। 
  • ज्योतिषीय समय की गणना देश के कुछ भागों के अक्षांश व रेखांश पर भी निर्भर करती है जहां सूर्योदय और चंद्रोदय के समय में भौगोलिक दृष्टि से अंतर रहेगा ही। पूर्वोत्तर भारत में सूर्य सबसे पहले दिखेगा,पश्चिमी भारत में रात देर से होगी। इसी के आधार पर हर राज्य विशेषकर दक्षिणी भारत के पंचांगों में कुछ अंतर अवश्य आ जाता है जो मतभेद का कारण बन जाता है। 
  • मुस्लिम धर्म में भी चांद का सर्वाधिक महत्व है। ईद का समय चांद दिखने पर ही तय किया जाता है परंतु हमारे पंचांग तो इतना तक बता सकते हैं कि 100 साल बाद चांद ,दिल्ली में किस दिन,कब दिखेगा,केरल में कब दिखेगा!
  • हमारे ग्रंथों में श्रीमद्भागवत,श्री विष्णुपुराण,वायुपुराण,अग्नि पुराण,भविष्यपुराण,सकंदपुराण,धर्मसिन्धु,निर्णयसिंन्धु आदि में पर्वों के निर्धारण के लिए बहुत से नियम दिए हैं,जिन्हें ध्यान में रखकर ही किसी त्योहार की बारीकी से तिथि और समय निर्धारित किए जाते हैं। जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री ने अमृत महोत्सव पर अपनी विरासत पर गर्व करने का आवाहन किया है,हम सभी भारतीयों को अपने वैदिक ज्योतिष,प्राचीन ग्रंथों का सम्मान करना चाहिए,उन पर गर्व करना चाहिए क्योंकि भारत आदिकाल से विश्व का मार्गदर्शन,अपने उपनिषदों,रामायण एवं गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों से करता आ रहा है और आज भी कर रहा है। हमारा यह संपूर्ण साहित्य वैज्ञानिक है, कपोल कल्पित नहीं।
  • आज इन तथ्यों का वैज्ञानिक आधार,गणित ठीक से समझाया नहीं जा रहा जिससे भ्रम ,असमंजस,संशय और उपहास की स्थिति अक्सर बन जाती है। हिन्दू धर्म से अधिक लचीला कोई धर्म नहीं है। इसमें ग्रंथों के अनुसार नियम बताए जाते हैं और कोई भी व्यक्ति देश,काल,पात्र,सुविधानुसार,पर्व की भावना एवं आस्थानुसार त्योहार मनाने के लिए स्वतंत्र है। 
  • यदि किसी त्योहार के दो दिन हैं तो आप अपने हिसाब से मना लें। हमारे यहां हर बात बहुत बारीकी से समझाई जाती है कि कौन सा उत्सव गृहस्थ मना सकते हैं कौन सा संन्यासी वर्ग मनाए। किस नवरात्रि का क्या महत्व है? किस श्राद्ध पर किस दिवंगत को याद किया जाए? अक्षय तृतीया या धनतेरस पर गृहपयोगी वस्तुएं क्यों खरीदी जाएं? ग्रहण कब-कब लगेंगे,कहां कहां दिखाई देंगे,ये तथ्य कंप्यूटर आने से कई सदियों पहले से बताए जा रहे हैं। मौसम,प्राकृतिक आपदाओं की सटीक जानकारी ज्योतिषशास्त्र प्राचीनकाल से देता आ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed