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Temple Flag: मंदिर के शिखर पर केसरिया रंग के ध्वज का क्या होता है महत्व?

Mon, 05 Aug 2024 09:02 PM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: शिखर बरनवाल Updated Mon, 05 Aug 2024 09:02 PM IST
सार

मंदिर पर दूर से ही केसरिया ध्वज को देखकर मन में सम्मान, सद्भावना और शांति की भावना आती है। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन झंडों का क्या महत्व है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि मंदिरों के शिखर पर ध्वजा लगाने के पीछे के क्या कारण है।
 

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hindu temple peak red kesariya flag importance in hindi
Temple - फोटो : iStock

विस्तार

Temple Kesariya Flag Importance: भारतीय संस्कृति में मंदिरों का विशेष महत्व होता है। मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि कला और वास्तुकला के अद्भुत नमूने भी हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि मंदिरों के शिखर पर रंग-बिरंगे झंडे लहराते रहते हैं। हिंदू धर्म में लाल रंग के ध्वज का बहुत महत्व होता है। हिंदू धर्म के लिए मंदिर पर लगा लाल ध्वज बहुत पवित्र माना जाता है। मंदिर पर दूर से ही इस ध्वज को देखकर मन में सम्मान, सद्भावना और शांति की भावना आती है। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन झंडों का क्या महत्व है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि मंदिरों के शिखर पर ध्वजा लगाने के पीछे के क्या कारण है।

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Temple - फोटो : iStock

मंदिर पर लगे लाल ध्वज का महत्व
मंदिर के शिखर पर लहराता हुआ झंडा दैवीय उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। यह दर्शाता है कि मंदिर परिसर पवित्र है और परमात्मा की पूजा के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर के ऊपर लहराता हुआ झंडा देवताओं का ध्यान आकर्षित करता है और उनके आशीर्वाद और कृपा को आमंत्रित करता है। ध्वजा लगाने से मंदिर के आस-पास पवित्रता की आभा पैदा होती है और वातावरण शुद्ध होता है, जिससे मंदिर के समग्र आध्यात्मिक माहौल में वृद्धि होती है। मंदिर के शिखर पर झंडा लगाने से मंदिर में आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह ध्वज एक पहचान चिह्न के रूप में कार्य करता है, जो उस पवित्र स्थान में पूजा की जाने वाले विशेष देवी-देवता की उपस्थिति को दिखाता है।

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Temple - फोटो : iStock

मंदिर के शिखर पर झंडा लगाने से मंदिर में आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ध्वजा लगाने से मंदिर के आस-पास पवित्रता की आभा पैदा होती है और वातावरण शुद्ध होता है, जिससे मंदिर के समग्र आध्यात्मिक माहौल में वृद्धि होती है। यह दर्शाता है कि मंदिर परिसर पवित्र है और परमात्मा की पूजा के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है। मंदिर के शिखर पर मौजूद इस ध्वज को दैवीय उपस्थिति का प्रतीक भी माना जाता है। साथ ही ये भी माना जाता है कि मंदिर के ऊपर लहराता हुआ झंडा देवताओं के आशीर्वाद और कृपा को आमंत्रित करता है।

मंदिर के शिखर पर लगे ध्वज एक पहचान चिह्न के रूप में कार्य करता है, जो उस पवित्र स्थान में पूजा की जाने वाले विशेष देवी-देवता की उपस्थिति को दिखाता है। मंदिर के इष्ट देव से जुड़े विशेष प्रतीक या रंग अंकित होते हैं। उदाहरण के लिए अगर मंदिर भगवान विष्णु की है उस मंदिर में गरुड़ जी की छवि अंकित हो सकती है, साथ ही अगर मंदिर शिव जी की है तो ध्वज पर नंदी की तस्वीर लगी होती है। इन ध्वजों पर मौजूद कई प्रतीकों को देखकर ही आप अनुमान लगा सकते हैं कि मंदिर मुख्य रूप से किसे भगवान को समर्पित है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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