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तुलसीदास ने यहीं पर हनुमान प्रतिमा के सामने बैठकर लिखी थी चौपाइयां

Tue, 11 Apr 2017 10:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 11 Apr 2017 10:37 AM IST
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hanuman jayanti special: chopiyan were written in front of hanuman idol
हनुमान
रामायण काल में इलाहाबाद से यमुनोत्री की परायण यात्रा पर निकले गोस्वामी तुलसीदास ने बाह के पारना गांव में यमुना नदी के किनारे हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर छैकुर के पेड़ के नीचे बैठकर रामचरित मानस के कुछ दोहे और चौपाइयां लिखी थीं। यहां पर रामबाग और सीता की कोढर स्थापित कर धर्म अध्यात्म की बयार बहाई थी। पारना में हनुमान मंदिर तो आज भी मौजूद है। 
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अपनी वृत्त परायण यात्रा के दौरान गोस्वामी तुलसी दास के बटेश्वर, नौगांव, पारना, भाऊपुरा पदचाप पडे़ थे। पारना में बाकायदा हनुमान प्रतिमा स्थापित कर 15 दिन रुके तुलसीदास ने रामचरित मानस के कुछ दोहे और चौपाई लिखे थे। 
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साहित्यकार डा. बीपी मिश्र ने बताया कि हनुमत प्रतिमा के पास ही तुलसी दास ने अपनी सिद्ध पीठ रामबाग बनाई। पास में ही सीता की कोढर थी। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मुराद पूरी होती थी। कई बार बाढ़ को झेलने के बाद पारना में हनुमत प्रतिमा वर्तमान में भव्य मंदिर में स्थापित है। हालांकि रामबाग और सीता की कोढर का अब अस्तित्व नहीं बचा है। 

78 वर्षीय होरीलाल ने बताया कि रामायण कालीन हनुमत प्रतिमा पर साल में दो बार मेला लगता है। हर मंगलवार को यहां पर भजन-कीर्तन का दौर चलता है। 76 वर्षीय दुजा देवी भी हनुमान मंदिर के प्रति लोगों की आस्था देख अभिभूत हैं।

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