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गृह लक्ष्मी माता
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Sat, 10 Nov 2012 01:22 PM IST
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भगवान विष्णु के साथ शेषनाग की शैय्या पर भगवान के पैर दबाते हुए जो लक्ष्मी मां का स्वरूप है वही गृह लक्ष्मी देवी हैं। गृह लक्ष्मी देवी गृहणियों में लज्जा, क्षमा, शील, स्नेह और ममता रूप में विराजमान रहती हैं। गृह लक्ष्मी का निवास मनुष्य का घर होता है। ये मकान में प्रेम तथा जीवंतता का संचार कर उसे घर बनाती हैं।
इनकी अनुपस्थिति में घर कलह, झगड़ों, निराशा आदि से भर जाता है। गृहस्वामिनी को गृह लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। गृहलक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए ही बहू के गृहप्रवेश के समय धान के कटोरे को पैर से स्पर्श करवाकर या कुंकुम से चरण चिह्न बनाकर गृह प्रवेश करवाया जाता है।
माना जाता है कि ऐसा करने से घर में समृद्धि आती है। बुराईयों के घर से विदा हो जाने का प्रतीक माना जाता है। जहां गृहस्वामिनी का सम्मान नहीं होता है, गृह लक्ष्मी उस घर को त्याग देती है।
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इनकी अनुपस्थिति में घर कलह, झगड़ों, निराशा आदि से भर जाता है। गृहस्वामिनी को गृह लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। गृहलक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए ही बहू के गृहप्रवेश के समय धान के कटोरे को पैर से स्पर्श करवाकर या कुंकुम से चरण चिह्न बनाकर गृह प्रवेश करवाया जाता है।
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माना जाता है कि ऐसा करने से घर में समृद्धि आती है। बुराईयों के घर से विदा हो जाने का प्रतीक माना जाता है। जहां गृहस्वामिनी का सम्मान नहीं होता है, गृह लक्ष्मी उस घर को त्याग देती है।
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