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हिन्दू ही नहीं, ये भी करते हैं शक्ति की देवी की पूजा
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Tue, 09 Apr 2013 11:39 AM IST
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चैत्र मास की नवरात्र आने वाली है, शक्ति की देवी मां दुर्गा की पूजा अर्चना की तैयारी में भक्त जुटे हुए हैं। हो सकता है कि आप वैष्णोदेवी या अन्य शक्तिपीठ की यात्रा की योजना बना रहे हों। लेकिन ऐसा नहीं है कि हम भारत में रहने वाले ही शक्ति की देवी की पूजा करते हैं।
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हिन्दू धर्म को नहीं मानने वाले भी शक्ति की देवी की पूजा करते हैं। अंतर बस यह है कि इन्होंने देवी का नाम दुर्गा या काली नहीं रखा है। लेकिन इनका स्वरूप और गुण वहीं है जो हिन्दू देवी का स्वरूप है।
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यूनान में शक्ति की देवी के रूप में नेमेसिस और डायना को पूजा जाता है। जिस प्रकार हिन्दू धर्म में मां काली को क्रोध और प्रतिशोध की देवी बताया गया है उसी प्रकार नेमेसिस भी क्रोध और प्रतिशोध की देवी के रूप में यूनान में पूजी जाती हैं।
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महिषासुर मर्दनी माता की तरह दुष्ट पशुओं का अंत करने वाली देवी के रूप में यूनान में 'देवी डायना' की पूजा की जाती है। यूनान के राजा इन देवियों की पूजा करते समय लाल वस्त्र धारण करके स्त्रियों के समान ऋंगार किया करते थे। हिन्दू धर्म में भी लाल वस्त्र धारण करके देवी की पूजा का विधान है।
हिन्दू धर्म में महाशक्ति के रूप में देवी पार्वती का नाम लिया जाता है। देवी पार्वती की तरह मिस्र के लोग देवी 'आइसिस' को मानते हैं। आइसिस भी मां पार्वती के समान संकट से रक्षा करने वाली और बच्चों की देवी हैं। जिस प्रकार पार्वती के पुत्र कार्तिक युद्ध के देवता माने जाते हैं उसी प्रकार देवी आइसिस के पुत्र होरस भी युद्ध के देवता हैं।
भारत के पड़ोसी देश चीन में बौद्ध धर्म के प्रति लोगों में काफी आस्था है। बौद्ध धर्म में देवी सरस्वती और दस महाविद्याओं में एक देवी तारा को एकाकार करने के प्रयास में देवी सरस्वती को नीले रंग में चित्रित किया गया। सरस्वती के इस रूप को नील सरस्वती नाम दिया गया। देवी का यह स्वरूप ज्ञान के साथ ही साथ युद्द कला में निपुण हैं।
चीन में सरस्वती के इसी रूप की पूजा होती है। देवी पुराण में बताया गया है कि लंका का राजा रावण देवी कात्यायनी का भक्त था। इसलिए लंका में आज भी देवी कात्यानी की पूजा की जाती है।