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Ganesh Chaturthi 2025: गणेशजी के श्राप से जुड़ा है गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन का निषेध, जानिए पौराणिक कथा

Sat, 23 Aug 2025 11:20 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 23 Aug 2025 11:20 AM IST
सार

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन यदि कोई व्यक्ति चंद्रमा का दर्शन कर ले, तो उसे जीवन में कलंक और झूठे आरोपों का सामना करना पड़ सकता है।

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Ganesh Chaturthi 2025 mythological story about the prohibition of moon viewing on ganesh chaturthi
Ganesh Chaturthi - फोटो : Adobe stock

विस्तार

हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का पर्व अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इस दिन भक्तगण भगवान गणेश की विधिवत पूजा करते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन की विघ्न-बाधाओं से मुक्ति पाते हैं। किंतु इस दिन से जुड़ा एक विशेष नियम शास्त्रों में वर्णित है भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन यदि कोई व्यक्ति चंद्रमा का दर्शन कर ले, तो उसे जीवन में कलंक और झूठे आरोपों का सामना करना पड़ सकता है।
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श्रीकृष्ण और चंद्र दर्शन का प्रसंग
इस कथा का प्रभाव भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में भी देखने को मिलता है। मान्यता है कि एक बार श्रीकृष्ण ने गणेश चतुर्थी के दिन अनजाने में चंद्रमा का दर्शन कर लिया। इसके परिणामस्वरूप उन पर स्यमंतक मणि चोरी का झूठा आरोप लग गया। निर्दोष होते हुए भी उन्हें समाज में  कई मिथ्या बातों का सामना करना पड़ा और अपनी निष्कलंकता सिद्ध करने के लिए अनेक कठिनाइयों से गुजरना पड़ा। इस घटना ने इस मान्यता को और अधिक पुष्ट कर दिया कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से वास्तव में झूठे आरोप और कलंक का भय उत्पन्न होता है।
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पौराणिक कथा, क्यों नहीं देखते हैं इस दिन चंद्रमा ?
पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान गणेश को गज का मुख लगाया गया तो वे गजानन कहलाए और माता-पिता के रूप में पृथ्वी की सबसे पहले परिक्रमा करने के कारण अग्रपूज्य हुए। सभी देवी-देवताओं ने उनकी स्तुति की पर चंद्रमा मंद-मंद मुस्कुराते रहें उन्हें अपने सौंदर्य पर अभिमान था। गणेशजी समझ गए कि चंद्रमा अभिमान वश उनका उपहास कर रहे हैं। क्रोध में आकर भगवान श्रीगणेश ने चंद्रमा को काले होने का श्राप दे दिया। इसके बाद चंद्रमा को अपनी भूल का एहसास हुआ। तब चंद्रदेव ने भगवान गणेश से क्षमा मांगी तो गणेश जी ने कहा कि सूर्य के प्रकाश को पाकर तुम एक दिन पूर्ण हो जाओगे यानी पूर्ण प्रकाशित होंगे। लेकिन चतुर्थी का यह दिन तुम्हें दण्ड देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। इस दिन को याद कर कोई अन्य व्यक्ति अपने सौंदर्य पर अभिमान नहीं करेगा। जो कोई व्यक्ति भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन तुम्हारे दर्शन करेगा,उस पर झूठा आरोप लगेगा।

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भूल से दर्शन होने पर क्या करें
अगर भूलवश या किसी अन्य कारणों से गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन हो जाये तो कलंक चतुर्थी की कृष्ण-स्यमंतक कथा को पढ़ने या सुनने पर गणेशजी क्षमा कर देते हैं। कलंक के दोष से बचने के लिए हर दूज का चाँद देखना भी जरूरी है। चतुर्थी पर चंद्र दर्शन हो जाए तो इस मंत्र को जपने से भी कलंक नहीं लगता है।

सिंहः प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमार मा रोदीस्तव ह्मेषः स्यमन्तकः।।



 
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