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इन बातों का रखें ध्यान, आपके घर भी आएंगी मां लक्ष्मी
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Thu, 08 Nov 2012 02:08 PM IST
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दीपावली का त्योहार आने वाला है। सभी लोग अपनी ओर से मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय में लगे हुए हैं ताकि, मां लक्ष्मी उन्हें धन-संपत्ति में वृद्धि का आशीर्वाद दें। लेकिन सिर्फ दीपावली के दिन घर को सजाने-संवारने और लक्ष्मी मां की पूजा करने से धन संपत्ति का आशीर्वाद मिलना संभव नहीं है। शास्त्रों के अनुसार मां लक्ष्मी की कृपा उन्हें ही प्राप्त होती है जो मन, वचन और कर्म से सात्विक होते हैं। इसके विपरीत आचरण करने वाले के पास धन आ भी जाए तो सदैव टिककर नहीं रहता है अथवा धन रहने पर भी व्यक्ति दुःखी रहता है।
शास्त्रों में बताये गये उपाय
शास्त्रों में बताया गया है कि मां लक्ष्मी सदैव विष्णु भगवान के साथ होती हैं। लक्ष्मी मां की पूजा करें और विष्णु की पूजा न करें तो लक्ष्मी कभी भी प्रसन्न नहीं हो सकती है। श्रीमद्देवी भागवत में बताया गया है कि लक्ष्मी के साथ विष्णु की पूजा अवश्य करनी चाहिए। बिना विष्णु की पूजा के लक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं की जा सकती है। इसलिए दीपावली के दिन गणेश और लक्ष्मी के साथ विष्णु भगवान की भी पूजा करें। अन्य दिनों में भी लक्ष्मी के साथ विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
शंख, तुलसी और शालिग्राम की जहां पूजा होती है वहां धन का अभाव नहीं होता है। शंख भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों को ही प्रिय हैं। शालिग्राम को शास्त्रों में साक्षात विष्णु का स्वरूप माना जाता है। शालिग्राम की पूजा बिना तुलसी के पूर्ण नहीं होती है। शलिग्राम और तुलसी के विषय में कथा है भगवान विष्णु ने तुलसी को वरदान दिया है कि 'मैं बिना तुम्हारे भोजन ग्रहण नहीं करूंगा।' इस तरह शंख, तुलसी और शालिग्राम में अद्भुत संबंध है। जहां पर शंख, तुलसी और शालिग्राम को पूजा जाता है वहां विष्णु और लक्ष्मी विराजते हैं।
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जिस परिवार में ब्राह्मणों को आदर पूर्वक भोजन करवाया जाता है और सभी देवी-देवताओं का आदर किया जाता है। ऐसा परिवार लक्ष्मी माता को प्रिया होता है। मां लक्ष्मी का एक रूप गृह लक्ष्मी बताया गया है। जहां पर गृहलक्ष्मी यानी घर की महिलाओं को सम्मान मिलता है और उनकी हंसी से वातावरण में उल्लास का संचार होता है। ऐसे घर में लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।
जिस घर में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है और सुबह-शाम आरती और संध्या पूजन किया जाता है वहां का वातावरण उर्जावान रहता है। ऐसे स्थान में लक्ष्मी मां रहना पसंद करती हैं। जिस घर के लोग दिन के समय सोते नहीं हैं और अपने घर एवं कार्य को पूरा करने के प्रति जागरूक रहते है वह घर मां लक्ष्मी को पसंद होता है। ऐसे घर में लक्ष्मी प्रसन्नता पूर्वक निवास करती हैं।
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शास्त्रों में बताये गये उपाय
शास्त्रों में बताया गया है कि मां लक्ष्मी सदैव विष्णु भगवान के साथ होती हैं। लक्ष्मी मां की पूजा करें और विष्णु की पूजा न करें तो लक्ष्मी कभी भी प्रसन्न नहीं हो सकती है। श्रीमद्देवी भागवत में बताया गया है कि लक्ष्मी के साथ विष्णु की पूजा अवश्य करनी चाहिए। बिना विष्णु की पूजा के लक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं की जा सकती है। इसलिए दीपावली के दिन गणेश और लक्ष्मी के साथ विष्णु भगवान की भी पूजा करें। अन्य दिनों में भी लक्ष्मी के साथ विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
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शंख, तुलसी और शालिग्राम की जहां पूजा होती है वहां धन का अभाव नहीं होता है। शंख भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों को ही प्रिय हैं। शालिग्राम को शास्त्रों में साक्षात विष्णु का स्वरूप माना जाता है। शालिग्राम की पूजा बिना तुलसी के पूर्ण नहीं होती है। शलिग्राम और तुलसी के विषय में कथा है भगवान विष्णु ने तुलसी को वरदान दिया है कि 'मैं बिना तुम्हारे भोजन ग्रहण नहीं करूंगा।' इस तरह शंख, तुलसी और शालिग्राम में अद्भुत संबंध है। जहां पर शंख, तुलसी और शालिग्राम को पूजा जाता है वहां विष्णु और लक्ष्मी विराजते हैं।
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जिस परिवार में ब्राह्मणों को आदर पूर्वक भोजन करवाया जाता है और सभी देवी-देवताओं का आदर किया जाता है। ऐसा परिवार लक्ष्मी माता को प्रिया होता है। मां लक्ष्मी का एक रूप गृह लक्ष्मी बताया गया है। जहां पर गृहलक्ष्मी यानी घर की महिलाओं को सम्मान मिलता है और उनकी हंसी से वातावरण में उल्लास का संचार होता है। ऐसे घर में लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।
जिस घर में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है और सुबह-शाम आरती और संध्या पूजन किया जाता है वहां का वातावरण उर्जावान रहता है। ऐसे स्थान में लक्ष्मी मां रहना पसंद करती हैं। जिस घर के लोग दिन के समय सोते नहीं हैं और अपने घर एवं कार्य को पूरा करने के प्रति जागरूक रहते है वह घर मां लक्ष्मी को पसंद होता है। ऐसे घर में लक्ष्मी प्रसन्नता पूर्वक निवास करती हैं।