{"_id":"65320be4e2a5203c9f0e65f6","slug":"durga-puja-start-in-bengal-kalparambha-puja-bilva-nimantran-muhurat-significance-2023-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Durga Puja 2023: आज से शुरू हो रही है दुर्गा पूजा, जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Durga Puja 2023: आज से शुरू हो रही है दुर्गा पूजा, जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त
Fri, 20 Oct 2023 10:43 AM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Fri, 20 Oct 2023 10:43 AM IST
सार
Durga Puja 2023: बंगाल में शारदीय नवरात्रि का अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि यानी छठे दिन से बंगाली समुदाय की दुर्गा पूजा शुरू हो जाती है। इस साल दुर्गा पूजा की शुरुआत आज यानी 20 अक्तूबर से हो रही है।
विज्ञापन
दुर्गा पूजा पंडाल (प्रतिकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social Media
विस्तार
Durga Puja 2023: शारदीय नवरात्रि के पावन दिन चल रहे हैं। इस दौरान मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हर साल नवरात्रि का भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है। नवरात्रि के दिनों में पूरी श्रद्धा के साथ माता रानी की आराधना करने से जीवन में समृद्धि आती है और कई परेशानियों से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है। बंगाल में शारदीय नवरात्रि का अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि यानी छठे दिन से बंगाली समुदाय की दुर्गा पूजा शुरू हो जाती है। इस साल दुर्गा पूजा की शुरुआत आज यानी 20 अक्तूबर से हो रही है। ऐसे में चलिए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ...
Shardiya Navratri 2023: अष्टमी-नवमी पर कब और कैसे करें हवन? जानें विधि और आवश्यक सामग्री
कल्पारंभ पूजा
शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि यानी दुर्गा पूजा का पहला दिन कल्पारंभ के नाम से जाना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन मां दुर्गा, सरस्वती जी, लक्ष्मी जी, और कार्तिकेय-गणेश के साथ धरती पर आती हैं। कल्पारम्भ पूजा के दिन मां दुर्गा की प्रतिमा से पर्दा हटाया जाता है।
विज्ञापन
कल्पारंभ पूजा 2023 तिथि
हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 19 अक्तूबर 2023 को प्रात: 12 बजकर 31 मिनट से होकर इसका समापन 20 अक्तूबर को रात में 11 बजकर 24 मिनट पर होगा। मान्यता है कि इसी दिन माता रानी को बिल्व वृक्ष या कलश में निवास करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
कल्पांरभ पूजा मुहूर्त - सुबह 06 बजकर 25 मिनट से सुबह 09 बजकर 15 मिनट तक
बिल्व निमंत्रण मुहूर्त - दोपहर 03 बजकर 30 मिनट तक से शाम 05 बजकर 47 मिनट तक है।
Durga Ashtami 2023: नवरात्रि में अष्टमी तिथि होती है सबसे खास, जानिए इसका महत्व
कल्पांरभ पूजा विधि
विज्ञापन
Shardiya Navratri 2023: अष्टमी-नवमी पर कब और कैसे करें हवन? जानें विधि और आवश्यक सामग्री
विज्ञापन
कल्पारंभ पूजा
शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि यानी दुर्गा पूजा का पहला दिन कल्पारंभ के नाम से जाना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन मां दुर्गा, सरस्वती जी, लक्ष्मी जी, और कार्तिकेय-गणेश के साथ धरती पर आती हैं। कल्पारम्भ पूजा के दिन मां दुर्गा की प्रतिमा से पर्दा हटाया जाता है।
विज्ञापन
कल्पारंभ पूजा 2023 तिथि
हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 19 अक्तूबर 2023 को प्रात: 12 बजकर 31 मिनट से होकर इसका समापन 20 अक्तूबर को रात में 11 बजकर 24 मिनट पर होगा। मान्यता है कि इसी दिन माता रानी को बिल्व वृक्ष या कलश में निवास करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
कल्पांरभ पूजा मुहूर्त - सुबह 06 बजकर 25 मिनट से सुबह 09 बजकर 15 मिनट तक
बिल्व निमंत्रण मुहूर्त - दोपहर 03 बजकर 30 मिनट तक से शाम 05 बजकर 47 मिनट तक है।
Durga Ashtami 2023: नवरात्रि में अष्टमी तिथि होती है सबसे खास, जानिए इसका महत्व
कल्पांरभ पूजा विधि
- कल्पांरभ पूजा की क्रिया प्रात: काल की जाती है।
- इस दौरान कलश में जल भरकर मां दुर्गा को समर्पित करते हुए इसकी स्थापना की जाती है।
- घट स्थापना के बाद ही महा सप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी, इन तीनों दिन मां दुर्गा की विधिवत पूजा-आराधना की जाती है।
- आखिरी दिन यानी विजयादशमी पर सिंदूर खेला होता है।
- इसके बाद मां को विदाई दी जाती है।