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दीपावली पर फंसा पेंच, किस दिन मनाएंगे दीपावली?
टीम डिजिटल
Updated Thu, 17 Oct 2013 12:34 PM IST
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दीपावली की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। लेकिन अब दीपावली को लेकर मामला उलझने लगा है। ज्योतिषशास्त्रियों में इस बात को लेकर मतभेद पैदा हो गया है कि दीपावली किस दिन मनाई जाएगी। यह प्रश्न यूं ही नहीं उठा है। इसके पीछे एक गंभीर मुद्दा है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में देवी-देवताओं की न तो पूजा होती है और न उन्हें स्पर्श किया जाता है। ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है और इस समय से मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं।
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इस वर्ष तीन नवम्बर को 3 बजकर 35 मिनट से सूर्य ग्रहण लग रहा है। ग्रहण रात में 8 बजबर 59 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण समाप्त होने तक अमावस्था तिथि भी समाप्त हो चुकी होगी, जबकि दीपावली अमावस्या तिथि में मनाई जाती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद तीन तारीख को कोई भी स्थिर लग्न नहीं होगा। जबकि दीपावाली पूजन के लिए स्थिर लग्न को शुभ फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि स्थिर लग्न में दीपावली पूजन करने से देवी लक्ष्मी स्थिर रहती है और जिससे सुख-समृद्घि बनी रहती है।
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ज्योतिषशास्त्र की गणना के अनुसार 3 नवंबर को स्थिर लग्न वृश्चिक सुबह 8 बजे से 10 बजे तक होगा। इसके बाद कुंभ लग्न 1 बजकर 45 मिनट से 3बजकर 15 मिनट तक रहेगा। अंतिम स्थिर लग्न वृष 6बजकर 15 मिनट से रात 8 बजे तक रहेगा। लेकिन ग्रहण के कारण इस समय पूजा करने में दुविधाजनक स्थिति बनी हुई है।
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कुछ विद्वानों का मत है कि 2 नवंबर की मध्य रात्रि में 12 बजकर 45 मिनट से 3 बजे सुबह तक का समय दीपावाली पूजन और साधना के लिए शुभ समय है। इसमें भी 12 बजकर 45 मिनट से 1 बजकर 50 मिनट का समय सर्वोत्तम है। इस समय अमावस्या तिथि, सिंह लग्न और स्वाती नक्षत्र का संयोग होने से लक्ष्मी पूजन करना बहुत ही शुभ फलदायी रहेगा।
ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा और पंडित जयगोविंदशास्त्री का मानना है कि सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। इसका प्रभाव स्पेन, पुर्तगाल, फ्रांस, इटली, स्विटजरलैंड, आस्ट्रिया, अमेरिका एवं मध्य अफ्रीका में दिखेगा। इसलिए इन देशों में रहने वाले भारतीयों को ग्रहण का ध्यान रखना होगा। भारत में वृष लग्न में शाम 6 बजकर 15 मिनट से 8 बजे तक दीपावली पूजन करना शुभ रहेगा।