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लक्ष्मी नहीं यह हैं अलक्ष्मी, कर्ज से मुक्ति दिलाने में यह देवी हैं सहायक

Mon, 25 May 2015 11:48 AM IST
Updated Mon, 25 May 2015 11:48 AM IST
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devi parvati dhumawati devi katha

शिव के जरिए प्रकट की गई दस महाविद्याओं में सातवीं पुरुषशून्या 'विधवा' आदि नामों से जानी जाने वाली मां 'धूमावती' को शास्त्रो में दरिद्रता, विपन्न, रोग बीमारी और अन्यान्य रोगों और आपदाओं का कारण माना गया है। इनका निवास ज्येष्ठा 'नक्षत्र' है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति जीवन भर किसी न किसी संघर्ष में उलझे रहते हैं।

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धूमावती को अलक्ष्मी नाम से भी जाना जाता है। इनकी पूजा-आराधना से लोगों के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। पुराण कथा है कि एक बार भगवान शिव-पार्वती कैलाश पर कुछ समय के लिए एक स्थान पर बैठ गए। पार्वती को भूख लगी। लेकिन शिव देर तक भोजन की व्यवस्था नहीं कर पाए। भूख से बेहाल 'पार्वती' ने शिव को ही निगल लिया, जिससे उनके शरीर से धुआं निकलने लगा।
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शिव अपने प्रभाव से बाहर आ गए। बाहर आकर शिव ने पार्वती से कहा, तुमने अपने पति को ही निगल लिया, अतः अब तुम विधवा हो गई हो। तुम उसी वेश में रहो। कहते हैं कि तभी से पार्वती विधवा की तरह रहने लगी। वे 'धूमावती' नाम से विख्यात हुई।

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कर्ज एवं रोग मुक्ति के लिए धूमावती की करें ऐसे पूजा

devi parvati dhumawati devi katha

धूमावती की कृपा से धर्म, अर्थ काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ सिद्ध होते बताए जाते हैं। गृहस्थ पुरुष को मां का यह मंत्र 'ॐ धूं धूं धूमावती स्वाहा' रुद्राक्ष की माला  से जपते हुए मां के सौम्यरूप की पूजा करनी चाहिए। इन्हीं मंत्रों से राई में नमक मिलाकर होम करने से शत्रुनाश, नीम की पत्तियों और घी का होम करने से कर्ज से मुक्ति मिल जाती जाती है।

काली मिर्च से होम करने से कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय एवं कारागार से मुक्ति मिलती है। जटामांसी और कालीमिर्च से होम करने पर जन्मकुंडली के सभी अकारक, गोचर एवं मारक दशाओं के ग्रहदोष नष्ट हो जाते हैं।

मां का सर्वोत्तम भोग मीठी रोटी और घी के द्वारा होम करने से से संकट टल जाते हैं। पूजा में सफेद रंग के फूल, आक के फूल, सफेद वस्त्र,केसर, अक्षत, घी, सफेद तिल, धतूरा, आक, जौ, सुपारी दूर्वा, गंगाजल, शहद, कपूर, चंदन,नारियल पंचमेवा आदि ही प्रयोग में लाएं।

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