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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   dattatreya jayanti 2021 date and significance know about of lord dattatreya

Dattatreya Jayanti 2021: दत्तात्रेय जयंती आज , ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का रूप हैं भगवान दत्तात्रेय

Sat, 18 Dec 2021 07:26 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 18 Dec 2021 07:26 AM IST
सार

ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के अंश दत्तात्रेय एक ऐसे अवतार हुए हैं, जिनके एक नहीं पूरे 24 गुरु हुए। दत्तात्रेय में ईश्वर एवं गुरु दोनों रूप समाहित हैं जिस कारण इन्हें श्री गुरुदेवदत्त भी कहा जाता है।

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dattatreya jayanti 2021 date and significance know about of lord dattatreya
मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को भगवान दत्तात्रेय के निमित्त व्रत करने व दर्शन-पूजन करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

विस्तार

Dattatreya Jayanti 2021 Date: सनातन धर्म में दत्तात्रेय पूर्णिमा या दत्ता पूर्णिमा (Dattatreya Jayanti) का बहुत अधिक महत्व है। यह मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि जो इस बार 18 दिसंबर,शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन त्रिगुण स्वरूप यानि ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव तीनों का सम्मलित स्वरूप दत्तात्रेय की पूजा का विधान है। दक्षिण भारत सहित पूरे देश में इनके अनेक प्रसिद्ध मंदिर भी हैं। मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को भगवान दत्तात्रेय के निमित्त व्रत करने व दर्शन-पूजन करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके अलावा भगवान विष्णु और शिवजी की कृपा से मनुष्य के बिगड़े काम बन जाते हैं।
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निराला है इनका स्वरूप
इनका स्वरूप बहुत निराला है, इनके तीन सिर हैं और छ: भुजाएं हैं। इनके भीतर ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश तीनों का ही संयुक्त रूप से अंश मौजूद है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से दत्तात्रेय के तीन सिर तीन गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं-सत्व, रजस और तमस एवं उनके छह हाथ यम(नियंत्रण),नियम (नियम),साम (समानता),दम (शक्ति) और दया का प्रतिनिधित्व करते हैं।  
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इन्हें बनाया अपना गुरु
ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के अंश दत्तात्रेय एक ऐसे अवतार हुए हैं, जिनके एक नहीं पूरे 24 गुरु हुए। दत्तात्रेय में ईश्वर एवं गुरु दोनों रूप समाहित हैं जिस कारण इन्हें श्री गुरुदेवदत्त भी कहा जाता है। दत्तात्रेय सिद्धों के परमाचार्य हैं, उन्होंने जिससे भी जो कुछ ज्ञान पाया उसे ही गुरु के रूप में स्वीकार किया। इनके गुरुओं में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, समुंद्र, चन्द्रमा व सूर्य जैसे आठ प्रकृति के तत्व हैं। जीव-जंतुओं में सर्प, मकड़ी, झींगुर,पतंगा,भौंरा, मधुमक्खी, मछली, कौआ, कबूतर, हिरण, अज़गर व हाथी सहित 12 गुरु हुए। बालक, लोहार, कन्या,और पिंगला नामक वेश्या को भी इन्होंने अपना गुरु स्वीकार किया । भगवान दत्तात्रेय ने कहा है कि हमें जीवन में जिस किसी से भी ज्ञान,विवेक व किसी न किसी रूप में कोई भी शिक्षा मिले,उसे ही अपना गुरु मान लेना चाहिए।  
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महर्षि अत्रि को दिया वरदान
श्री मदभागवत ग्रंथ में एक प्रसंग है कि महर्षि अत्रि ने जगत के पालनहार परमेश्वर श्री विष्णु को पुत्र रूप में पाने की अभिलाषा की थी। उनकी इस इच्छा को पूर्ण करने के लिए एक दिन भगवान ने प्रकट होकर महर्षि से कहा-'मैंने स्वयं को आपको दिया।'इसी देने के भाव से 'दत्त' और अत्रि के ज्येष्ठ पुत्र होने से आत्रेय का मिला हुआ रूप दत्तात्रेय हुआ एवं इनकी माता परम पतिभक्त सती अनुसूया थी।
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