{"_id":"2191c2ae-dfb9-11e1-975e-d4ae52ba91ad","slug":"benefits-of-ganga-snan","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा स्नान के ये हैं फायदे","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
गंगा स्नान के ये हैं फायदे
Updated Mon, 06 Aug 2012 04:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शास्त्रों के अनुसार जिस दिन गंगा
विज्ञापन
पृथ्वी पर आयी थी उस दिन जेष्ठ शुक्ल दशमी तिथि थी। इसलिए हर वर्ष जेष्ठ
शुक्ल दशमी तिथि को गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन
गंगा स्नान करके दान-पुण्य करने से कई गुणा अधिक पुण्य प्राप्त होता है।
ब्रह्मपुराण में कहा गया है कि 'ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता। हरते दश पापानि तस्माद् दशहरा स्मृता।।' इसका अर्थ है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि हस्त नक्षत्र से युक्त होने पर दस प्रकार के पापों का नाश करने वाली है। इस दिन गंगा स्नान करने से छल, कपट, लोभ, परनिंदा, बुरे विचार के कारण लगने वाले दोष समाप्त होते हैं। अवैध संबंध, अकारण जीवों को कष्ट पहुंचाने एवं असत्य बचन बोलने से जो पाप लगता है वह पाप भी गंगा स्नान से धुल जाता है।
गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान और पूजा अर्चना के बाद बाल काटकर गंगा में विसर्जित करने पर स्वास्थ्य लाभ मिलता है एवं जीवन पर आने वाले संकटों से बचाव होता है। इस दिन शिव पूजा का भी विधान है। गंगा जब स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी तब अपने वेग से पृथ्वी पर हहाकार मचाने लगी।
भगवान शिव ने पृथ्वी की रक्षा के लिए गंगा को अपनी जटाओं में बांध लिया और गंगा की एक धारा को पृथ्वी पर उतार दिया। शास्त्रों कहा गया है कि भगवान विष्णु के चरणों से निकली और शिव की जटाओं में लिपटी गंगा के जल में डुबकी लगाने मात्र से विष्णु और शिव का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त हो जाता है।
गंगा दशहरा के दिन गंगा अवतरण की कथा सुनने से भी पुण्य लाभ मिलता है। जो लोग गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं वह अपने घर में ही बाल्टी में जल भरकर उसमें थोड़ा गंगा जल मिलाकर गंगा माता का स्मरण करते हुए स्नान करें। इससे भी गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
ब्रह्मपुराण में कहा गया है कि 'ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता। हरते दश पापानि तस्माद् दशहरा स्मृता।।' इसका अर्थ है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि हस्त नक्षत्र से युक्त होने पर दस प्रकार के पापों का नाश करने वाली है। इस दिन गंगा स्नान करने से छल, कपट, लोभ, परनिंदा, बुरे विचार के कारण लगने वाले दोष समाप्त होते हैं। अवैध संबंध, अकारण जीवों को कष्ट पहुंचाने एवं असत्य बचन बोलने से जो पाप लगता है वह पाप भी गंगा स्नान से धुल जाता है।
गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान और पूजा अर्चना के बाद बाल काटकर गंगा में विसर्जित करने पर स्वास्थ्य लाभ मिलता है एवं जीवन पर आने वाले संकटों से बचाव होता है। इस दिन शिव पूजा का भी विधान है। गंगा जब स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी तब अपने वेग से पृथ्वी पर हहाकार मचाने लगी।
भगवान शिव ने पृथ्वी की रक्षा के लिए गंगा को अपनी जटाओं में बांध लिया और गंगा की एक धारा को पृथ्वी पर उतार दिया। शास्त्रों कहा गया है कि भगवान विष्णु के चरणों से निकली और शिव की जटाओं में लिपटी गंगा के जल में डुबकी लगाने मात्र से विष्णु और शिव का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त हो जाता है।
गंगा दशहरा के दिन गंगा अवतरण की कथा सुनने से भी पुण्य लाभ मिलता है। जो लोग गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं वह अपने घर में ही बाल्टी में जल भरकर उसमें थोड़ा गंगा जल मिलाकर गंगा माता का स्मरण करते हुए स्नान करें। इससे भी गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।