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केदारनाथः शिवलिंग को स्पर्श कर निकल गया सैलाब
राकेश/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 21 Jun 2013 05:54 PM IST
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हिन्दू धर्म की आस्था के दो प्रमुख स्तंभ हैं, बद्रीनाथ और केदारनाथ। इन्हें मोक्ष धाम भी कहते हैं। इसलिए मोक्ष प्राप्ति की इच्छा लिये हर साल लाखों श्रद्घालु बद्रीनाथ और केदानाथ की यात्रा करते हैं। इस साल भी जब 13 मई को यात्रा शुरू हुई तो श्रद्घालु चल पड़े बद्री-केदार के दर्शनों के लिए।
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लेकिन हाल ही में बरसी आसमानी आफत ने आस्था के स्तंभ को हिला दिया। गांधी सरोवर से अचानक कई फीट ऊंची लहर यमराज बनकर दौड़ पड़ी। मौत को सामने देखकर लोग सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचने के लिए भागे। लेकिन लहरों ने भागने का मौका नहीं दिया, जो भी रास्ते में आया मौत ने उन्हें निगल लिया।
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जिनकी आस्था अभी भी जिंदा है
कुछ खुशकिस्मत ऐसे हैं जो आफत के समय केदारनाथ के मुख्य मंदिर में मौजूद थे। बाढ़ के विनाश से त्रस्त्र हजारों तीर्थयात्री भले ही अब केदारनाथ न जाने की बात कर रहे हों लेकिन उस समय मंदिर में मौजूद लोगों की आस्था पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है।
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ऐसी ही एक तीर्थयात्री हैं बबीता। इनका कहना है कि जब आसमान से आफत बरसी तो वो मुख्य मंदिर में ही थी। बकौल बबीता 'अचानक इतना पानी आया कि मंदिर में छह फीट से अधिक पानी भर गया। मंदिर के बाहर मौजूद नंदी महाराज का चबूतरा और नंदी महाराज को नुकसान पहुंचा।'
बबीता ने बताया कि सैलाब में शिवलिंग पूरी तरह डूब गया लेकिन थोड़ी ही देर में शिवलिंग से पानी उतर गया मानो शिवलिंग को स्नान करवाकर पानी वापस लौट रहा हो।
बबिता की तरह मौत को मात देकर लौटे एक अन्य तीर्थयात्री बताते हैं कि तीन धाम की यात्रा पूरी हो चुकी थी, सिर्फ केदारनाथ की यात्रा रह गयी थी जो अधूरी ही रह गयी। इन्हें भी केदारनाथ के दर्शन नहीं मिलने का अफसोस है।
भारत के फिरकी गेंदबाजी हरभजन सिंह भी तबाही की रात उत्तराखंड में थे। यह हेमकुण्ड साहिब के दर्शनों के लिए यहां आए थे। लेकिन अचानक आई तबाही ने सारे रास्ते बंद कर दिए और हरभजन सिंह को जोशीमठ से ही लौटना पड़ा।
सिक्खों के लिए हेमकुण्ड साहिब बद्री और केदारनाथ की तरह ही आस्था का केन्द्र है। हरभजन सिंह को इस बात का मलाल है कि वह हेमकुण्ड साहिब के दर्शन नहीं कर पाए।