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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Apara Ekadashi 2025 Vishnu Ji and Ekadashi Mata Aarti Lyrics in Hindi

Apara Ekadashi Aarti Lyrics: अपरा एकादशी आज, धन, सुख और समृद्धि के लिए जरूर पढ़ें यह आरती

Fri, 23 May 2025 10:08 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 23 May 2025 10:08 AM IST
सार

Apara Ekadashi: अपरा एकादशी को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से पापों से मुक्ति और शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन विशेष आरती का पाठ करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
 

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Apara Ekadashi 2025 Vishnu Ji and Ekadashi Mata Aarti Lyrics in Hindi
Apara Ekadashi 2025 - फोटो : adobe

विस्तार

Apara Ekadashi 2025 Aarti: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व है। हर माह आने वाली एकादशी तिथि को यह व्रत श्रद्धा और भक्ति से रखा जाता है। जेष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है, जो इस वर्ष 23 मई 2025 को मनाई जाएगी।

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यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है, और ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। अपरा एकादशी के दिन व्रत करने के साथ यदि भक्त भगवान विष्णु और एकादशी माता की आरती श्रद्धा से गाते हैं, तो उनकी पूजा पूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को कभी धन-संपत्ति या समृद्धि की कमी नहीं होती।
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Apara Ekadashi 2025 Vishnu Ji and Ekadashi Mata Aarti Lyrics in Hindi
Apara Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock

भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, 
स्वामी ! जय जगदीश हरे।
ॐ जय जगदीश हरे।

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।

स्वामी दुःख विनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ॐ जय जगदीश हरे।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।

स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

स्वामी तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

स्वामी तुम पालन-कर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

स्वामी सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ॐ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

स्वामी तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।

स्वमी पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे।

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

स्वामी जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

Apara Ekadashi 2025 Vishnu Ji and Ekadashi Mata Aarti Lyrics in Hindi
Apara Ekadashi 2025 - फोटो : adobe

॥ एकादशी माता की आरती ॥

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता।

विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,शक्ति मुक्ति पाता॥

ॐ जय एकादशी…॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी,भक्ति प्रदान करनी।

गण गौरव की देनी माता,शास्त्रों में वरनी॥

ॐ जय एकादशी…॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना,विश्वतारनी जन्मी।

शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा,मुक्तिदाता बन आई॥

ॐ जय एकादशी…॥

पौष के कृष्ण पक्ष की,सफला नामक है।

शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा,आनन्द अधिक रहै॥

ॐ जय एकादशी…॥

नाम षटतिला माघ मास में,कृष्ण पक्ष आवै।

शुक्लपक्ष में जया, कहावै,विजय सदा पावै॥

ॐ जय एकादशी…॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष मेंशुक्ला आमलकी।

पापमोचनी कृष्ण पक्ष में,चैत्र महाबलि की॥

ॐ जय एकादशी…॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,धन देने वाली।

नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में,वैसाख माह वाली॥

ॐ जय एकादशी…॥

शुक्ल पक्ष में होयमोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।

नाम निर्जला सब सुख करनी,शुक्लपक्ष रखी॥

ॐ जय एकादशी…॥

योगिनी नाम आषाढ में जानों,कृष्णपक्ष करनी।

देवशयनी नाम कहायो,शुक्लपक्ष धरनी॥

ॐ जय एकादशी…॥

कामिका श्रावण मास में आवै,कृष्णपक्ष कहिए।

श्रावण शुक्ला होयपवित्रा आनन्द से रहिए॥

ॐ जय एकादशी…॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की,परिवर्तिनी शुक्ला।

इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में,व्रत से भवसागर निकला॥

ॐ जय एकादशी…॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में,आप हरनहारी।

रमा मास कार्तिक में आवै,सुखदायक भारी॥

ॐ जय एकादशी…॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की,दुखनाशक मैया।

पावन मास में करूंविनती पार करो नैया॥

ॐ जय एकादशी…॥

परमा कृष्णपक्ष में होती,जन मंगल करनी।

शुक्ल मास में होयपद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥

ॐ जय एकादशी…॥

जो कोई आरती एकादशी की,भक्ति सहित गावै।

जन गुरदिता स्वर्ग का वासा,निश्चय वह पावै॥

ॐ जय एकादशी…॥


 
                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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