Ganpati visarjan 2021: इस मुहूर्त में करें बप्पा को विदा, विसर्जन करते समय इन बातों का रखें ध्यान
Ganesh Visarjan 2021 Shubh Muhurat of Ganpati Visarjan Significance Puja Vidhi: इस समय हर जगह गणेश उत्सव मनाया जा रहा है। घर-घर बप्पा विराजे हुए हैं। दस दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव में प्रतिदिन विधि-विधान से बप्पा की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा का विसर्जन कर दिया जाता है और बप्पा को अगले वर्ष आने की प्रार्थना की जाती है। कुछ लोग अपनी कामना अनुसार सातवें या नवें दिन भी विसर्जन कर देते हैं लेकिन बप्पा का विसर्जन गणेश उत्सव के पूर्ण होने पर ही करना चाहिए। जिस तरह से पूरे गणेश उत्सव के दौरान विधि पूर्वक पूजा अर्चना की जाती है उसी तरह से गणपति बप्पा का विसर्जन भी पूरे विधि-विधान से करना आवश्यक होता है। गणपति विसर्जन शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए और कुछ बातों को ध्यान में अवश्य रखना चाहिए। इस बार अनंत चतुर्दशी 19 सितंबर दिन रविवार को पड़ रही है, इसलिए इसी दिन गणेश विसर्जन किया जाएगा। तो आइए जानते हैं गणेश विसर्जन का शुभ मुहुर्त और ध्यान रखने योग्य बातें...
गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त-
चतुर्दशी तिथि आरंभ- 19 सितंबर 2021 दिन रविवार प्रातः 05 बजकर 59 मिनट से
चतुर्दशी तिथि समाप्त- 20 सितंबर 2021 दिन सोमवार प्रातः 05 बजकर 28 मिनट पर
प्रातः काल विसर्जन मुहूर्त- 07 बजकर 40 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 15 मिनट तक
दोपहर विसर्जन मुहूर्त- 01 बजकर 46 मिनट से लेकर शाम को 03 बजकर 18 मिनट तक
संध्या काल विसर्जन मुहूर्त- शाम को 06 बजकर 21 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 46 मिनट तक
- गणेश विसर्जन से पहले भगवान गणेश की पूजा अर्चना करें।
- गणेश की चौकी सजाने के लिए एक साफ लकड़ी का पाट लें और उसे गंगाजल से शुद्ध करें
- अब एक साफ लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और गणपति बप्पा को जयघोष के साथ आराम से चौकी पर विराजमान करें।
- चौकी पर पान-सुपारी, मोदक दीप और पुष्प रखें।
- अब गणपति बप्पा को धूमधाम से विसर्जन के लिए ले जाएं।
- विसर्जन से पहले गणपति बप्पा की आरती करें तत्पश्चात उन्हें विसर्जित करें।
गणेश विसर्जन करने से पहले क्षमा प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए।
कई बार लोग ऐसे ही दूर से प्रतिमा को पानी में डाल देते हैं लेकिन यह गलती नहीं करनी चाहिए।
गणपति जी को आराम से पूरे सम्मान के साथ विसर्जित करना चाहिए। इसके साथ ही समस्त समाग्री को भी सम्मान के साथ प्रवाहित करें।
अपने द्वारा की गई गलतियों की क्षमा के साथ मंगल करने की प्रार्थना करनी चाहिए।