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Anang Trayodashi Vrat Katha: अनंग त्रयोदशी पर करें इस कथा का पाठ, महादेव होंगे प्रसन्न

Sun, 21 Apr 2024 12:31 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 21 Apr 2024 12:31 PM IST
सार

त्रयोदशी तिथि रविवार देर रात 1 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। 21 अप्रैल को पूरा दिन, पूरी रात सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। साथ ही रविवार शाम 5 बजकर 8 मिनट तक उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा।

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Anang Trayodashi Vrat Katha Pradosh Vrat In Hindi disprj
अनंग त्रयोदशी व्रत कथा - फोटो : amar ujala

विस्तार

Anang Trayodashi Vrat Katha:चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को अनंग त्रयोदशी कहा जाता है। अनंग कामदेव का ही एक नाम है, इसलिए अनंग त्रयोदशी पर कामदेव का पूजन किया जाता है। कामदेव के पूजन से मनुष्य का व्यक्तित्व आकर्षक बनता है। आज यानी 21 अप्रैल को अनंग त्रयोदशी का पावन पर्व है, यह दिन शिवजी को समर्पित है। त्रयोदशी तिथि रविवार देर रात 1 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। 21 अप्रैल को पूरा दिन, पूरी रात सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। साथ ही रविवार शाम 5 बजकर 8 मिनट तक उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 21 अप्रैल को अनंग त्रयोदशी है।आइए जानते हैं इससे जुड़ी कथा के बारे में। 

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पौराणिक कथा 
तारकासुर नाम के राक्षस ने खूब आतंक फैलाया हुआ था। सभी देवी देवता उसके आतंक से परेशान आ गए थे। उसके आतंक से बचने के लिए सभी कामदेव के पास पहुंचे और उनसे आग्रह कर कहा कि वह तपस्या में लीन भगवान शिव की तपस्या भंग कर दें। तारकासुर नाम के राक्षस को वरदान दिया गया था कि उसकी मृत्यु भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही होगी। इसीलिए सभी ने कामदेव से आग्रह स्वीकार किया और उन्होंने भगवान शिव की तपस्या भंग कर दी लेकिन, उन्हें महादेव के क्रोध का सामना करना पड़ा। महादेव ने कामदेव को भस्म कर दिया। यह सब देखकर कामदेव की पत्नी से भगवान शिव से आग्रह किया की वह कामदेव को पुन: जीवित कर दें। भगवान शिव ने रति का आग्रह स्वीकार किया। उन्होंने कामदेव को पुनर्जीवित तो किया लेकिन उन्हें शरीर नहीं लौटा पाए। इसके बाद भगवान शिव ने कामदेव को दो वरदान दिए। भगवान शिव के वरदान के अनुसार, उन्होंने कामदेव से कहा की तुम द्वापरयुग में भगवान कृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेंगे इसके बाद उनके विवाह देवी रति से ही होगा। भगवान शिव ने कामदेव को दूसरे वरदान में कहा कि श्री कृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेने तक कामदेव को बिना अंगों के रहना होगा। जिस वजह से उनका एक नाम अनंग भी कहलाया जाएगा। जिस दिन यह पूरी घटना घटी उस दिन त्रयोदशी तिथि थी। इसलिए उसी दिन से ऐसे अनंग त्रयोदशी के रुप में मनाया जाने लगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति भी अनंग त्रयोदशी के दिन कामदेव और रति की पूजा करेगा, उसका प्रेम संबंध मजबूत होगा। साथ ही इस व्रत को करने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद भी प्राप्त होगा।

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