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हर तिथि के देवता होते हैं अलग, पूजा करने से मिलता है पुण्य फल
Thu, 02 May 2024 07:31 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 02 May 2024 07:31 AM IST
सार
हिंदू धर्म में प्रत्येक देवताओं के लिए विशेष दिवस और तिथि होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हर तिथि के देवता भी अलग होते हैं और उस तिथि पर उनकी पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
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चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश हैं। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन करने से सभी विघ्नों एवं दुखों का नाश हो जाता है।
- फोटो : istock
विस्तार
हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक एक दिन माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार 15 दिन शुक्ल पक्ष और 15 दिन कृष्ण पक्ष होता है। शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहते हैं और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या होती है। प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष में 15 तिथियां होती हैं इसी प्रकार अगले 15 दिन कृष्ण पक्ष के होते हैं। हिंदू धर्म में प्रत्येक देवताओं के लिए विशेष दिवस और तिथि होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हर तिथि के देवता भी अलग होते हैं और उस तिथि पर उनकी पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
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तिथि और उसके देवता
प्रतिपदा- इस तिथि के देवता अग्निदेव माने गए हैं। अग्निदेव की पूजा से मनुष्य को धन की प्राप्ति होती है।
द्वितीया -इस तिथि के देवता भगवान ब्रह्मा को माना गया है। इस तिथि में ब्रह्माजी की पूजा से समस्त ज्ञान एवं विद्या से मनुष्य परिपूर्ण होता है।
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तृतीया (तीज)- इस तिथि में पार्वतीजी की पूजा करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। यक्षराज कुबेर भी तृतीया के स्वामी माने गये हैं। अतः इनकी भी पूजा करने से धन-धान्य, समृद्धि प्राप्त होती है।
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चतुर्थी (चौथ)- चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश हैं। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन करने से सभी विघ्नों एवं दुखों का नाश हो जाता है।
पंचमी (पांचें)- इस तिथि के देवता नागराज माने गए हैं। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से सर्पदंश का भय खत्म होता है और मनचाही संतान व पत्नी की प्राप्ति होती।
षष्ठी (छठ)- इस तिथि के स्वामी शिवपुत्र भगवान कार्तिकेय माने गए हैं। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है।
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सप्तमी- इस तिथि के स्वामी सूर्य हैं।ये दिन विशेष रूप से भगवान सूर्य की उपासना के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य की उपासना करने से धन-धान्य में वृद्धि और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
अष्टमी (आठें)- इस तिथि के देवता भगवान रुद्र हैं और इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा से ज्ञान और कांति की प्राप्ति होती है,साथ ही सारे कष्ट और रोग दूर होते हैं।
नवमी (नौमी)- नवमी तिथि देवी दुर्गा की उपासना के लिए समर्पित है।इस दिन देवी मां की पूजा से मनुष्य हर क्षेत्र में विजयी होता है एवं उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
दशमी (दशम)- इस तिथि के देवता यमराज हैं। यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
एकादशी (ग्यारस)- एकादशी तिथि के देवता स्वयं भगवान विष्णु हैं। इस दिन जगत के पालनहार श्री विष्णु की पूजा करने से संतान, धन-धान्य और सभी सुखों की की प्राप्ति होती है।
द्वादशी (बारस)- इसके देवता भी भगवान विष्णु हैं। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
त्रयोदशी (तेरस)- इस तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं ,इस दिन शिवजी की पूजा करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। त्रयोदशी में कामदेव की भी पूजा करने से सुन्दर और योग्य जीवन साथी मिलता है साथ ही वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।
चतुर्दशी (चौदस)- इसके देवता भी भगवान शंकर हैं। इस तिथि में भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य की समस्त मनोकानाएं पूर्ण हो जाती हैं।
अमावस्या (अमावस)- इस तिथि के देवता अर्यमा मानें गए हैं और ये पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने का विधान होता है। पितरों की पूजा से सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है और वंश वृद्धि के साथ धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति की प्राप्ति होती है।
पूर्णिमा (पूर्णमासी)- यह तिथि चंद्रदेव की पूजा के लिए समर्पित है और इस दिन चंद्रदेव की पूजा और अर्घ्य देने से मनुष्य सौभाग्यशाली बन जाता है और सभी जगह से उसे यश और कीर्ति मिलती है।