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Apara Ekadashi Vrat Katha: 13 मई को अपरा एकादशी, पूजा के समय जरूर पढ़ें यह व्रत कथा
Wed, 13 May 2026 06:01 AM IST
Shweta Singh
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shweta Singh
Updated Wed, 13 May 2026 06:01 AM IST
सार
अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। जानें अपरा एकादशी व्रत कथा, पूजा विधि और इस व्रत से मिलने वाले सुख-समृद्धि के लाभ।
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अपरा एकादशी व्रत कथा
- फोटो : amar ujala
विस्तार
Apara Ekadashi Vrat Katha: अपरा एकादशी का व्रत सनातन धर्म में बेहद पुण्यदायी माना जाता है। यह पावन तिथि भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अपरा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से श्री हरि और मां लक्ष्मी की उपासना करते हैं। साथ ही पूजा के समय व्रत कथा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि बिना कथा सुने या पढ़े एकादशी व्रत अधूरा रहता है।
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अपरा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में महीध्वज नाम के एक अत्यंत धार्मिक और न्यायप्रिय राजा थे। उनका छोटा भाई स्वभाव से ईर्ष्यालु और अधर्मी था। वह अपने बड़े भाई से द्वेष रखता था और उन्हें रास्ते से हटाना चाहता था। एक रात उसने छलपूर्वक राजा महीध्वज की हत्या कर दी और उनके शव को जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे दबा दिया।
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अकाल मृत्यु होने के कारण राजा की आत्मा को शांति नहीं मिली और वह प्रेत योनि में उसी पीपल के वृक्ष पर भटकने लगी। उस स्थान पर आने-जाने वाले लोगों को वह आत्मा परेशान करने लगी, जिससे वहां भय का वातावरण बन गया।
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कुछ समय बाद महान तपस्वी धौम्य ऋषि उस मार्ग से गुजरे। अपने दिव्य ज्ञान और तपोबल से उन्होंने उस प्रेतात्मा की पीड़ा और उसके पीछे का कारण जान लिया। ऋषि ने दया भाव से उस आत्मा का उद्धार करने का संकल्प लिया। उन्होंने विधिपूर्वक अपरा एकादशी का व्रत किया और उसके पुण्य का फल उस प्रेतात्मा को समर्पित कर दिया।
ऋषि के तप और एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा महीध्वज को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई। इसके बाद उन्होंने ऋषि का आभार व्यक्त किया और दिव्य लोक को प्रस्थान किया। धार्मिक मान्यता है कि अपरा एकादशी व्रत कथा का श्रद्धा पूर्वक पाठ करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
एकादशी कब है
- अपरा एकादशी - 13 मई 2026, बुधवार
- 14 मई पारण समय - 05:31 AM से 08:14 AM
- पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 11:20 AM
- एकादशी तिथि प्रारम्भ - 12 मई 2026 को 02:52 PM बजे
- एकादशी तिथि समाप्त - 13 मई 2026 को 01:29 PM बजे
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।