भगवान श्री कृष्ण भले ही इस धरती पर लीला करके अपना लौकिक शरीर छोड़कर चले गए लेकिन अलौकिक रूप से आज भी इनकी मौजूद कण-कण में है लेकिन इसकी दिव्य अनुभूति आप असानी से इन 10 स्थानों पर कर सकते हैं।
यहां आकर देखिए आज भी श्री कृष्ण की मौजूदगी का एहसास करेंगे
यह है भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली। कहते हैं यहीं पर श्री कृष्ण का जन्म कंस के कारावास में हुआ था। यहां एक एक बड़ा सा चबूतरा बना हुआ है जिसे श्री कृष्ण के जन्म का साक्षी माना जाता है। कमाल की बात तो यह है कि यहां पर भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति नहीं है फिर भी चबूतरे पर सिर टिकाकर श्रद्धालुओं को श्री कृष्ण की मौजूदगी का अनुभव होता है।
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यह है भंडीर वन का वह स्थान जहां भगवान श्री कृष्ण का राधा के संग विवाह हुआ माना जाता है। पूरी दुनिया में अकेला यहीं पर श्री कृष्ण राधा का विग्रह है जहां श्री कृष्ण राधा की मांग में सिंदूर भरते दिखते हैं। गर्ग संहिता में राधा कृष्ण के विवाह का जिक्र किया गया है जिसमें ब्रह्मा जी को विवाह करवाने वाला पुरोहित बताया गया है। यहां एक कूप है जिसे भंडीर कूप कहा जाता है जिसके बारे में मान्यता है कि हर सोमवती अमावस्या के दिन कूप से दूध की धारा निकलती है।
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भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामां यानी काम्यवन यहां पर भगवान श्री कृष्ण ने व्योमासुर का वध किया था। व्योमासुर का वध करने के बाद श्री कृष्ण ने एक कुंड में स्नान किया जिसे क्षीर सागर और कृष्ण कुंड के नाम से जाना जाता है। स्नान के बाद श्री कृष्ण ने ग्वाल सखाओं के संग भोजन किया। यहां पहाड़ी पर भोजन के लिए इस्तेमाल किया गया थाल और कटोरी का चिन्ह मौजूद है।
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वृंदावन का निधिवन भी कृष्ण की मौजूदगी करवाते हैं। इस वन के वृक्षों की बनावट ऐसी है जैसे कोई नृत्य की मुद्रा में खड़ा हो। कहते हैं कि इसी वन में श्री कृष्ण ने गोपियों संग रास रचाया था। इस वन के वृक्ष रात के समय गोपियां बन जाती हैं। श्री कृष्ण राधा के संग दिव्य रूप में प्रकट होकर यहां रात्रि विश्राम करते हैं। हर सुबह गीले दातून इस बात का संकेत देते हैं कि श्री कृष्ण ने दंत धावन किया है।