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जानें किन्हें और क्यों नहीं मिलता माला जप का फल?

Fri, 03 May 2019 02:17 PM IST
Madhukar Mishra पं. धनंजय दुबे, ज्योतिर्विद
पं. धनंजय दुबे, ज्योतिर्विद Published by: Madhukar Mishra Updated Fri, 03 May 2019 02:17 PM IST
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know how to use garland for mantra chanting
mala jaap

जीवन में प्रत्येक व्यक्ति आगे बढ़ने के लिए कर्म और धर्म साथ-साथ लेकर चलता है। आम आदमी के कर्म के साथ ही हमारे जगत में कुछ प्राकृतिक शक्तियां भी निहित हैं, जिन्हें हम मंत्र के द्वारा प्राप्त करते हैं। पूजा अर्चना के बाद विशेष प्राप्ति या सिद्धि के लिए मंत्र जाप किया जाता है। इसके माध्यम से आप मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपके द्वारा किया गया मंत्र जाप का उचित फल नहीं मिलता है और आप के साथ कुछ न कुछ अनिष्ट होता रहता है। तो आइए जानते हैं कि मंत्र जाप करते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए — 

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कैसे करें मंत्रो का चयन 
आम तौर पर व्यक्ति ये सोचता है कि यह मंत्र धन का है या लाभ का है या इससे यह लाभ होता है। व्यक्ति मंत्र अपने हिसाब से शुरू करता है, माला जपता है, लेकिन उसका फल नहीं प्राप्त होता है। लेकिन ध्यान रहे कि कभी भी अपने पुरोहित या गुरु के आदेश के बिना माला से मंत्र जाप करना शुरु न करें, अन्यथा इसका दुष्परिणाम भी आपको झेलना पड़ सकता है। माला की पूजा किए बिना तो कभी जाप करना ही नहीं चाहिए। अगर कोई ऐसी विकट स्थिति आ जाये तो अपने इष्ट देव या अपने गुरु का ध्यान करके आप मंत्र जाप आरम्भ कर सकते हैं। 
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जप माला कैसी होनी चाहिए
अमूमन व्यक्ति बाजार जाता है और कैसी भी माला खरीद लेता है। इसके बाद वह माला से मंत्र जाप शुरू कर देता, लेकिन यह गलत है। माला पर जाप करने से पहले माला की पूजा होती है। माला आम तौर पर रुद्राक्ष के 108 दाना की होनी चाहिए और यह कभी भी नीले या काले धागे में नहीं गुथी होनी चाहिए। 
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माला जप की विधि 
माला जप करने के लिए आसन अच्छा होना चाहिए। माला जप के लिए लाल या सफ़ेद आसान होना चाहिए। यह आसन ऊनी या कुश का होना चाहिए। कपड़े का आसन नहीं होना चाहिए। माला जप करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। जाप करते समय माला के ऊपर सुमेरु को कभी क्रास नहीं करना चाहिए। सुमेरु के पास जाते ही दुबारा आप को वापस होना चाहिए। जब कभी माला जाप आरम्भ करें तो माला को शुद्ध जल से धो लें और उसका तिलक करके धूप दिखाए। इसके पश्चात् प्रार्थना करें कि आप हमारे मकसद में हमें सफल करें। 

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जब करें किसी विशेष प्रयोजन के लिए जाप
जब आप किसी विशेष मकसद के लिए जाप करें तो ध्यान रखें कि उस कार्य विशेष से संबंधित उचित माला होना चाहिए। ध्यान रखें कि जाप करने के लिए एक निश्चित संख्या होती है और उसके बाद जाप को उस देवता के प्रति समर्पित कर दिया जाता है, तभी जाकर मंत्र जाप का फल प्राप्त होता है। बिना संकल्प किए मंत्र जाप करने का कोई फल नहीं मिलता है।

माला जाप करते समय रखें विशेष सावधानी 
माला जाप करते समय आप को यह मालूम होना चाहिए कि कितनी संख्या में आप को माला जाप करना है। इसके लिए जो स्थान निश्चित होता है, आप उसी स्थान पर माला जप करें। उचित आसन पर करें और माला जाप के दौरान मौन रहें। कोशिश करें कि आप की आंखे बंद हों। जब आप पालथी मार कर बैठें तो आप का मेरुदण्ड सीधा होना चाहिए। कभी भी दीवार के सहारे नहीं बैठना चाहिए। माला जप करते समय आप को मंत्र पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए और श्वांस की गति पर ध्यान देना चाहिए। कभी भी माला जाप करने के लिए जल्दबाजी में न बैठें। जब तक आपकी निश्चित संख्या पूर्ण न  हो, आप आसान पर से न उठें और उठना ही पड़ जाए तो दोबारा से जप आरम्भ करें। 


माला जप के बाद करना न भूलें यह कार्य 
जब माला जाप कर लें, तो उसके बाद आप हाथ में जल और अक्षत लें और अपने इष्टदेव या अपने गुरुदेव का ध्यान कर मन ही मन संकल्प करं कि मैंने जो भी पूजा की है, यह आपको समर्पित है। इस भाव से जल और अक्षत रख दें तो आप का किया हुआ माला जाप और मंत्र जाप आप को उचित फल देता है। माला जाप के बाद हवन की विधि है। जितना माला जाप किया गया हो, हमेशा उसका दशांश हवन करना चाहिए। 

बिना प्रयोजन के किया गया माला जाप 
बिना प्रयोजन के मंत्र जाप करते समय जप का समय और संख्या सुनिश्चित कर लेनी चाहिए और माला कभी नहीं बदलना चाहिए। ध्यान रहे कि अपनी जप माला किसी और को न देनी चाहिए और न ही किसी की लेनी चाहिए। जब कभी भी आप जप माला लें तो अपने पुरोहित या गुरु द्वारा ही लें और दक्षिणा के तौर पर आप उन्हें जरूर कुछ न कुछ दें। तभी मंत्र जाप का लाभ होता है। मंत्र गुरु द्वारा ही लेना उचित रहता है। जब आप मंत्र जाप करें तो सप्ताह में कम से कम एक बार अन्न और घी का दान ब्राह्मण को जरूर दें। इससे किए हुए मंत्र जाप का लाभ मिलता है।



 

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