Yogini Ekadashi: योगिनी एकादशी आज, जानें पूजन और पारण का समय, इन बातों का रखें ध्यान
विधि विधान से योगिनी एकादशी व्रत को करने से 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन करने के बराबर का फल मिलता है, इसलिए इस व्रत का अपना विशेष महत्व है। योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभफलदायी माना गया है। जो भक्त योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करते हैं, उन्हें पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है।
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Yogini Ekadashi: आज 24 जून, शुक्रवार को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधि विधान से योगिनी एकादशी व्रत को करने से 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन करने के बराबर का फल मिलता है, इसलिए इस व्रत का अपना विशेष महत्व है। हमारे सनातन धर्म में एकादशी का बड़ा महत्त्व है, इस दिन जगत के पालनकर्ता श्री विष्णु की आराधना होती है। पंचांग के अनुसार हर माह में दो पक्ष होते है और हर पक्ष में एक एकादशी आती है। योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभफलदायी माना गया है। जो भक्त योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करते हैं, उन्हें पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है। ये भी कहा जाता है कि योगिनी एकादशी व्रत करने वाले लोगों को मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के चरणों में जगह प्राप्त होती है। महाभारत में स्वयं श्री कृष्ण ने धर्मराज और कुंती पुत्र युधिष्ठिर को इस व्रत का महत्त्व समझाया था। इस माह की एकादशी 24 जून को पूरे दिन रहने वाली है और 25 जून को सुबह 8 बजे तक मंदिर में विष्णु का दर्शन कर व्रत का पारण किया जा सकता है।
एकादशी का महत्व
श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर से कहा कि जो इस एकादशी के व्रत को करता है उसके समस्त पाप मिट जाते है और उसे नर्क की किसी यातना का भोग नहीं करना पड़ता है। जो योगिनी एकादशी व्रत रखते हैं उनकी आत्मा को श्री विष्णु के धाम की प्राप्ति हो जाती है। यमराज के दूत ऐसे भक्त को कोई पीड़ा नहीं पहुंचा सकते है। जो इस व्रत को करता है उसे 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य मिल जाता है। श्री कृष्ण ने आगे कहा, जो भी भक्ति भाव से इस दिन व्रत रखकर ईश्वर को पूजता है उसका कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है।
एकादशी के नियम
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है इसलिए सूर्य उदय के बाद उठकर संकल्प लेने से व्रत खंडित होता है। इस दिन अन्न ग्रहण नहीं करते और वाणी पर संयम रखना होता है। अगर इस दिन आप क्रोध करते है या किसी को अपनी वाणी से पीड़ा देते है तो भी व्रत खंडित माना जाता है। पूजा के बाद और पारण के बाद गरीब को अवश्य भोजन करवाएं। शास्त्रों का निर्देश है कि जो इस व्रत को करता है उसे भूमि पर शयन करना है, मांस मदिरा का सेवन नहीं करना है। इस दिन पूरी साफ़ सफाई से व्रत का निर्वहन करना होता है। संध्या काल में श्री विष्णु का पूजन और आरती करने के बाद फल का सेवन करें और अगले दिन मंदिर में विष्णु के दर्शन कर व्रत का पारण करने के बाद ही अन्न ग्रहण करे। मान्यता है कि इस दिन श्री विष्णु की 108 परिक्रमा करने वाला व्यक्ति जीवन के बंधन से मुक्त हो जाता है।