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Vat Savitri Purnima 2024: आज अखंड सौभाग्य की कामना का व्रत वट पूर्णिमा, जानिए पूजाविधि और महत्व
Fri, 21 Jun 2024 11:01 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 21 Jun 2024 11:01 AM IST
सार
वट सावित्री व्रत अमावस्या की तरह ही ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को वट पूर्णिमा का व्रत किया जाता हैं। इस व्रत की तिथि को लेकर भिन्न मत हैं।
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वट वृक्ष की पूजा करतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Vat Savitri Purnima 2024: आज यानी 21 जून, शुक्रवार के दिन वट सावित्री पूर्णिमा’का व्रत को रखा जाएगा। करवाचौथ की तरह ही पति की दीर्घायु और सुहाग की रक्षा के लिए वट सावित्री व्रत रखा जाता है। वट सावित्री व्रत अमावस्या की तरह ही ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को वट पूर्णिमा का व्रत किया जाता हैं। इस व्रत की तिथि को लेकर भिन्न मत हैं। स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यह व्रत करने का विधान है, वहीं निर्णयामृत आदि के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को व्रत करने की बात कही गई है।
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पूजाविधि
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई करें। फिर स्नान-ध्यान कर पवित्र, स्वच्छ और सुन्दर वस्त्र धारण करें। इस दिन सोलह श्रृंगार करना अति शुभ माना जाता है। इसके बाद सबसे पहले सूर्यदेव को अर्घ्य दें। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्त्रियां उपवास रखकर बरगद वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा आराधना करती हैं। पूजा के समय महिलाओं को शुद्ध जल और कच्चा दूध से वट वृक्ष को सींच कर वृक्ष के तने में कच्चा सूत या लाल मौली लपेटकर कम से कम सात प्रदिक्षणा करनी चाहिए। एक बांस की टोकरी में सात तरह के अनाज रखें व दूसरी टोकरी में सावित्री की प्रतिमा रख कर जल, अक्षत, कुमकुम से उनकी पूजा करें। तदन्तर परम पतिव्रता सावित्रीदेवी से इस प्रकार प्रार्थना करें।
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जगतपूज्ये जगन्मातः सावित्रि पतिदैवते
पत्या सहवियोगं मे वतस्थे कुरु ते नमः॥
अर्थात 'जगन्माता सावित्रि ! तुम संपूर्ण जगत के लिए पूजनीय तथा पति को ही इष्टदेव मानने वाली पतिव्रता हो। वट वृक्ष पर निवास करने वाली देवी! तुम ऐसी कृपा करो,जिससे मेरा अपने पति के साथ नित्य संयोग बना रहे। कभी वियोग न हो। तुम्हें मेरा सादर नमस्कार है।जो नारी प्रार्थना करके दूसरे दिन सुवासिनी स्त्रियों को भोजन कराने के पश्चात स्वयं भोजन करती है और अपनी क्षमता के अनुसार दान दक्षिणा देते हुए अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं वह सदा सौभाग्यवती बनी रहती है,ऐसी शास्त्रों में मान्यता है।
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व्रत की महिमा
पीपल की तरह वट या बरगद के पेड़ का भी विशेष महत्व है। पाराशर मुनि के अनुसार- 'वट मूले तोपवासा' ऐसा कहा गया है। पुराणों में यह स्पष्ट किया गया है कि वट में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास है। इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा आदि सुनने से मनोकामना पूरी होती है। वट वृक्ष अपनी विशालता के लिए भी प्रसिद्ध है। मान्यता है इस व्रत को करने से पति को लंबी आयु प्राप्त होती है। इस व्रत की कथा सावित्री और सत्यवान से जुड़ी है। कहते हैं, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से जीवित कराया था।