{"_id":"5c4ed3f8bdec224bd41e1e7f","slug":"vasant-panchami-2019-date-time-and-know-why-do-we-celebrate-vasant-panchami","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basant Panchami 2019: 10 फरवरी को है बसंत पंचमी, जानें इस दिन सरस्वती की पूजा क्यों की जाती है?","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Basant Panchami 2019: 10 फरवरी को है बसंत पंचमी, जानें इस दिन सरस्वती की पूजा क्यों की जाती है?
Mon, 28 Jan 2019 03:35 PM IST
विनोद शुक्ला
निशा घई, हस्तरेखा विशेषज्ञ, अंकशास्त्री एवं ज्योतिषविद्
निशा घई, हस्तरेखा विशेषज्ञ, अंकशास्त्री एवं ज्योतिषविद्
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 28 Jan 2019 03:35 PM IST
सार
- 10 फरवरी 2019 को मनाई जाएगी बसंत पंचमी
- बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती का जन्म हुआ था
- बसंत पंचमी के दिन शब्दों की शक्ति मनुष्य के जीवन में आई थी
- माँ सरस्वती को साहित्य, कला, संगीत और शिक्षा की देवी माना जाता है
- छात्रों, संगीतकारों, कलाकारों के लिए यह विशेष महत्व का दिन है
विज्ञापन
बसंत पंचमी 2019
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बसंत पंचमी का पर्व बसंत ऋतु के आगमन की सूचना देता है। चारों तरफ हरियाली महकते फूलों की छटा बिखेरती है और मंद वायु से वातावरण सुहाना हो जाता है। खेत खलिहानों में पीली सरसों लहलहाने लगती है। शरद ऋतु की विदाई के साथ पेड़ पौधों और प्राणियों में नये जीवन का संचार होता है।
ऐसा माना जाता हैं कि बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती का अवतार हुआ था। कहते है कि माँ सरस्वती के आगमन से प्रकृति का श्रृंगार हुआ तभी से बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करने की परंपरा शुरू हुई।
बसंत पंचमी मनाने के संबंध में कई मत प्राप्त हैं। एक मत के अनुसार इस दिन विद्या की देवी सरस्वती का पूजन करना चाहिये। दूसरे मत में इसे लक्ष्मी सहित विष्णु के पूजन का दिन बताया गया है। एक अन्य मत के अनुसार इस तिथि को रति और कामदेव की पूजा भी करना चाहिए क्योंकि कामदेव और बसंत मित्र हैं।
विज्ञापन
बसंत पंचमी को सरस्वती की पूजा क्यो?
बसंत पंचमी 10 फरवरी 2019 को है। भारत में माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती की पूजा के दिन रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि इसी दिन शब्दों की शक्ति मनुष्य के जीवन में आई थी। पुराणों में लिखा है सृष्टि को वाणी देने के लिये ब्रह्मा जी ने कमंडल से जल लेकर चारों दिशाओं में छिड़का। इस जल से हाथ में वीणा धारण किये जो शक्ति प्रकट हुई वह सरस्वती कहलाई। उनके वीणा का तार छेड़ते ही तीनो लोकों में ऊर्जा का संचार हुआ और सबको शब्दों की वाणी मिल गई। वह दिन बसंत पंचमी का दिन था इसलिये बसंत पंचमी को सरस्वती देवी का दिन भी माना जाता है।
वीणा और ज्ञान की देवी सरस्वती
वाग्देवी, वीणावादिनी जैसे नामों से जाने वाली देवी ज्ञान और विद्या का प्रतीक है। इन्हें साहित्य, कला, संगीत और शिक्षा की देवी माना जाता है। माँ शारदे की चारों भुजाएं चारों दिशाओं का प्रतीक हैं। एक हाथ में वीणा, दूसरे में वेद की पुस्तक, तीसरे में कमंडल तथा चौथे में रूद्राक्ष की माला। यह प्रतीक हमारे जीवन में प्रेम, समन्वय विद्या, जप, ध्यान तथा मानसिक शांति को प्रकट करते हैं।
इस दिन कैसे करे माँ को प्रसन्न?
- बसंत पंचमी के दिन कोई उपवास नहीं होता, केवल पूजा होती है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने, हल्दी का तिलक लगाकर, मीठे चावल बना कर पूजा करने का विधान है।
- विद्यार्थियों, संगीतकार, कलाकारों के लिए यह विशेष महत्व का दिन है। उन्हें अपनी पुस्तकों, वाद्यों आदि की अवश्य पूजा करनी चाहिए। पीला रंग समृद्धि का सूचक भी कहा जाता है।
मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिये मंत्र का जाप करेंः-
ऊँ ऐं सरस्वत्चैं ऐं नमः का 108 बार जाप करें।
सरस्वती सोत्रम
इस प्रार्थना से माँ को प्रसन्न करें।
या कुन्देन्दु-तुषारहार-धवला या शुभ्र-वस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकर-प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
विज्ञापन
ऐसा माना जाता हैं कि बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती का अवतार हुआ था। कहते है कि माँ सरस्वती के आगमन से प्रकृति का श्रृंगार हुआ तभी से बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करने की परंपरा शुरू हुई।
विज्ञापन
बसंत पंचमी मनाने के संबंध में कई मत प्राप्त हैं। एक मत के अनुसार इस दिन विद्या की देवी सरस्वती का पूजन करना चाहिये। दूसरे मत में इसे लक्ष्मी सहित विष्णु के पूजन का दिन बताया गया है। एक अन्य मत के अनुसार इस तिथि को रति और कामदेव की पूजा भी करना चाहिए क्योंकि कामदेव और बसंत मित्र हैं।
विज्ञापन
बसंत पंचमी को सरस्वती की पूजा क्यो?
बसंत पंचमी 10 फरवरी 2019 को है। भारत में माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती की पूजा के दिन रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि इसी दिन शब्दों की शक्ति मनुष्य के जीवन में आई थी। पुराणों में लिखा है सृष्टि को वाणी देने के लिये ब्रह्मा जी ने कमंडल से जल लेकर चारों दिशाओं में छिड़का। इस जल से हाथ में वीणा धारण किये जो शक्ति प्रकट हुई वह सरस्वती कहलाई। उनके वीणा का तार छेड़ते ही तीनो लोकों में ऊर्जा का संचार हुआ और सबको शब्दों की वाणी मिल गई। वह दिन बसंत पंचमी का दिन था इसलिये बसंत पंचमी को सरस्वती देवी का दिन भी माना जाता है।
वीणा और ज्ञान की देवी सरस्वती
वाग्देवी, वीणावादिनी जैसे नामों से जाने वाली देवी ज्ञान और विद्या का प्रतीक है। इन्हें साहित्य, कला, संगीत और शिक्षा की देवी माना जाता है। माँ शारदे की चारों भुजाएं चारों दिशाओं का प्रतीक हैं। एक हाथ में वीणा, दूसरे में वेद की पुस्तक, तीसरे में कमंडल तथा चौथे में रूद्राक्ष की माला। यह प्रतीक हमारे जीवन में प्रेम, समन्वय विद्या, जप, ध्यान तथा मानसिक शांति को प्रकट करते हैं।
इस दिन कैसे करे माँ को प्रसन्न?
- बसंत पंचमी के दिन कोई उपवास नहीं होता, केवल पूजा होती है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने, हल्दी का तिलक लगाकर, मीठे चावल बना कर पूजा करने का विधान है।
- विद्यार्थियों, संगीतकार, कलाकारों के लिए यह विशेष महत्व का दिन है। उन्हें अपनी पुस्तकों, वाद्यों आदि की अवश्य पूजा करनी चाहिए। पीला रंग समृद्धि का सूचक भी कहा जाता है।
मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिये मंत्र का जाप करेंः-
ऊँ ऐं सरस्वत्चैं ऐं नमः का 108 बार जाप करें।
सरस्वती सोत्रम
इस प्रार्थना से माँ को प्रसन्न करें।
या कुन्देन्दु-तुषारहार-धवला या शुभ्र-वस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकर-प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥