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Valmiki Jayanti 2020: कौन थे महर्षि वाल्मीकि, लिखा था संस्कृत का पहला श्लोक

Fri, 30 Oct 2020 06:44 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Fri, 30 Oct 2020 06:44 AM IST
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Valmiki Jayanti 2020 who was mahershi Valmiki know the sotry of Valmiki
वाल्मीकि जयंती 2020 - फोटो : pinterst

वाल्मीकि जयंती 31 अक्तूबर को मनायी जाएगी। महर्षि वाल्मीकि ने महाकाव्य रामायण की रचना की थी। इसलिए उन्हें 'आदिकवि' के नाम से जाना जाता है। वाल्मीकि जयंती को देशभर में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन शहर-शहर शोभायात्रा निकाली जाती है। मंदिरों में श्रद्धा के साथ उनकी आराधना की जाती है। आइए जानते हैं कौन थे महर्षि वाल्मीकि और क्या है धार्मिक महत्व।

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कौन थे वाल्मीकि
महर्षि वाल्मीकी के जन्म के बारे में कोई स्पष्ट प्रमाण तो नहीं मिलता है लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि वाल्मिकी के जन्म के बारे में कोई स्पष्ट प्रमाण तो नहीं मिलता है लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानी कि शरद पूर्णिमा को महर्षि वाल्मीकि का जन्म हुआ था। उनका जन्म महर्षि कश्यप और अदिति के नौवें पुत्र वरुण और उनकी पत्नी चर्षणी के यहां माना जाता है। भृगु ऋषि इनके बड़े भाई थे। वे विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। वाल्मीकि के द्वारा लिखी गई रामायण आज भी सनातन धर्म मानने वालों के लिए पूजनीय है। 

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वाल्मीकि जयंती 2018

ऐसे पड़ा था वाल्मीकि नाम
महर्षि वाल्मीकि के नाम के विषय में भी कहा जाता है कि एक बार महर्षि वाल्मीकि ध्यान में मग्न थे। तब उनके पूरे शरीर को दीमको ने घर लिया था। साधना पूर्ण होने के बाद वे दीमक को हटा कर बाहर निकले थे। दीमकों के घर को वाल्मीकि कहा जाता है। इसी के कारण उनका नाम वाल्मीकि हुआ।

मां सीता को दिया था आश्रय
जब भगवान राम ने माता सीता को त्याग दिया था। तब माता सीता महर्षि वाल्मिकी का आश्रम में ही रहती थी। यहीं पर उन्होंने लव और कुश को जन्म दिया था। यहां पर माता सीता वनदेवी के नाम से निवास करती थी। इसी वजह से वाल्मिकी द्वारा लिखी गई रामायण में लव कुश के जन्म के बाद का वृतांत भी मिलता है। महर्षि वाल्मिकी के द्वारा ही लव कुश को ज्ञान भी दिया गया।

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वाल्मीकि जयंती 2020 - फोटो : pinterst

लिखा था संस्कृत का प्रथम श्लोक

मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः ।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम् ॥ 

ऐसा कहा जाता है कि उपरोक्त श्लोक संस्कृत का पहला श्लोक है जिसे महर्षि वाल्मीकि ने लिखा था। दरअसल यह श्लोक एक बहेलिये के लिए श्राप था जिसने एक क्रौंच पक्षी के जोड़े में से नर पक्षी को बाण मारा था।  

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