Vaishakh Amavasya 2021: वैशाख अमावस्या आज, पितरों को प्रसन्न करने के लिए जरूर करें यह उपाय
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Vaishakh Amavasya 2021: वैशाख अमावस्या आज है। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण यह भौम अमावस्या है। शास्त्रों में वैशाख अमावस्या को धर्म-कर्म, स्नान-दान और पितरों के तर्पण के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। यह पितरों को मोक्ष दिलाने वाली तिथि है। इस दिन पितरों के लिए तर्पण करने का विधान है। इस तिथि में सूर्य और चंद्रमा दोनों ग्रह मेष राशि में विराजमान होंगे।
वैशाख अमावस्या तिथि 10 मई की रात 09 बजकर 55 मिनट पर प्रारंभ होगी और इसकी समाप्ति 12 मई को 12 बजकर 29 मिनट पर होगी।
अमावस्या की पूजा विधि
- अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठें।
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
- सूर्योदय के समय भगवान सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें।
- इस दिन कर्मकांड के साथ अपने पितरों का तर्पण करें।
- पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें।
- जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
मान्यता के अनुसार वैशाख अमावस्या के दिन चावल से बने पिंड का दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। मंगलवार के दिन अमावस्या की तिथि पड़ने के कारण इस दिन विधि पूर्वक पूजा करने से मंगल दोष के प्रभाव भी दूर होते हैं। पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण एवं उपवास करें और किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें। अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर सुबह जल चढ़ाना चाहिए और संध्या के समय दीपक जलाना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को वस्त्र और अन्न का दान करना चाहिए।
बहुत समय पहले धर्मवर्ण नाम के एक ब्राह्मण थे। वे बहुत ही धार्मिक प्रवृति के थे। एक बार किसी महात्मा ने उन्हें बताया कि घोर कलियुग में भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से ज्यादा पुण्य किसी भी कार्य में नहीं है। जो पुण्य यज्ञ करने से प्राप्त होता था उससे कहीं अधिक पुण्य फल नाम सुमिरन करने से मिल जाता है। धर्मवर्ण ने इसे आत्मसात कर सन्यास लेकर भ्रमण करने निकल गए। एक दिन भ्रमण करते-करते वह पितृलोक जा पंहुचे। वहां धर्मवर्ण के पितर बहुत कष्ट में थे। पितरों ने उसे बताया कि उनकी ऐसी हालत धर्मवर्ण के सन्यास के कारण हुई है क्योंकि अब उनके लिए पिंडदान करने वाला कोई शेष नहीं है। यदि तुम वापस जाकर गृहस्थ जीवन की शुरुआत करो, संतान उत्पन्न करो तो हमें राहत मिल सकती है। साथ ही वैशाख अमावस्या के दिन विधि-विधान से पिंडदान करें। धर्मवर्ण ने उन्हें वचन दिया कि वह उनकी अपेक्षाओं को अवश्य पूर्ण करेगा। तत्पश्चात धर्मवर्ण अपने सांसारिक जीवन में वापस लौट आया और वैशाख अमावस्या पर विधि विधान से पिंडदान कर अपने पितरों को मुक्ति दिलाई।