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Somvati Amavasya 2025: सोमवती अमावस्या पर तर्पण और दान का महत्व, जानिए पूजा विधि और उपाय
Mon, 26 May 2025 11:08 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 26 May 2025 11:08 AM IST
सार
Somvati Amavasya 2025: हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस अमावस्या पर पितरों का तर्पण करने और गंगा स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है।
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ज्येष्ठ माह की अमावस्या का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Somvati Amavasya 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन आती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि अत्यंत शुभ, पुण्यदायक और दुर्लभ मानी जाती है। जब यह अमावस्या ज्येष्ठ मास में आती है, तो इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस दिन व्रत, दान, स्नान, पितृ तर्पण तथा वटवृक्ष (बरगद के पेड़) की पूजा का विशेष महत्व है। विशेष रूप से विवाहित स्त्रियां इस दिन अपने पति के दीर्घायु जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं।
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पौराणिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने, व्रत रखने और दान करने से हजारों अश्वमेध यज्ञों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है एवं इस दिन किए गए कर्मों का फल शीघ्र प्राप्त होता है और समस्त पाप नष्ट होते हैं।
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ज्येष्ठ अमावस्या और वटवृक्ष की पूजा
ज्येष्ठ मास की अमावस्या अत्यंत गर्मी और प्राकृतिक शुष्कता के बीच आती है। इस समय वटवृक्ष की पूजा करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह छायादार, दीर्घायु और जीवनदायी वृक्ष है। वटवृक्ष को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखकर वटवृक्ष की परिक्रमा करती हैं। वे उसके तने पर सूती धागा या कलावा लपेटती हैं और जल, रोली, चावल, फूल व मीठा अर्पित कर पूजा करती हैं। यह व्रत अखंड सौभाग्य, संतान सुख और पति की लंबी उम्र के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
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पितृ तर्पण और दान का महत्व
सोमवती अमावस्या को पितृ तर्पण और पिंडदान के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों, विशेष रूप से गंगा में स्नान कर तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से लाभकारी होता है। साथ ही, गरीबों को अन्न, वस्त्र, पंखा, जल का घड़ा, छाता और शीतल पेय का दान करना भी पुण्यदायक माना गया है।
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सुख-समृद्धि के लिए पांच प्रमुख उपाय
- प्रातःकाल स्नान कर ताजे जल में गंगाजल मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
- वटवृक्ष की पूजा करें, मीठा जल चढ़ाएं, कलावा लपेटें और 108 बार परिक्रमा करें।
- पितरों के लिए तिल मिश्रित जल से तर्पण करें और उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, पंखा, छाता, मटका आदि का दान करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र चढ़ाकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें।
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