फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   somvati amavasya 2021 chaitra amavasya date significance importance

Somvati Amavasya 2021: 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या, पितृ श्राप से मुक्ति का दिन

Sun, 11 Apr 2021 06:59 AM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 11 Apr 2021 06:59 AM IST
सार

  • पितृ श्राप से मुक्ति एवं उनके आशीर्वाद प्राप्ति की सर्वाधिक महत्वपूर्ण तिथि चैत्र अमावस्या 12 अप्रैल, सोमवार को है।

विज्ञापन
somvati amavasya 2021 chaitra amavasya date significance importance
आत्मा के स्वामी सूर्य और मन के स्वामी चंद्र जब एक ही राशि में आ जाते हैं तो अमावस्या होती है।  - फोटो : Social Media

विस्तार

पितृ श्राप से मुक्ति एवं उनके आशीर्वाद प्राप्ति की सर्वाधिक महत्वपूर्ण तिथि चैत्र अमावस्या 12 अप्रैल, सोमवार को है। आश्विन माह के पितृपक्ष की तरह ही चैत्र कृष्ण पक्ष को भी श्राद्ध-तर्पण के लिए श्रेष्ठ माना गया है और चैत्र माह की अमावस्या को पितृ विसर्जन की ही तरह श्रेष्ठ फलकारक माना गया है। इस तिथि के दिन संयोगवश सोमवार हो तो यह अद्भुत पुण्यफल देने वाली तिथि बन जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आत्मा के स्वामी सूर्य और मन के स्वामी चंद्र जब एक ही राशि में आ जाते हैं तो अमावस्या होती है। 

विज्ञापन


इसी तिथि के दिन प्राणियों में सहज वैराग्य का भाव जागृत होता है क्योंकि मन और आत्मा के एकाकार होने से चित्त कुछ पलों के लिए निर्मल और एकाग्र हो जाता है तभी इन तिथियों को साधना के लिए श्रेष्ठ कहा गया है। सूर्य और चन्द्र के संयोग से ही पूर्णिमा और अमावस्या की तिथियों का निर्धारण होता है। जब ये दोनों ग्रह भ्रमण करते हुए परस्पर 180 अंश पर तब पूर्णिमा होती है और एक साथ आ जाते हैं तो अमावस्या होती है। 
विज्ञापन


भगवान शिव ने कृष्ण पक्ष से लेकर अमावस्या तक का अधिभार पितरों को एवं शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक का अधिभार देवों को दिया हैं। इसीलिए पितृ से सम्बंधित सभी श्राद्ध-तर्पण आदि कार्य अमावस्या तक और सकाम अनुष्ठान अथवा बड़े यज्ञ आदि कार्य शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक के मध्य किये जाते हैं। इन सभी युतियों में आश्विन अमावस्या और चैत्र की अमावस्या में सूर्य एवं चन्द्र का मिलन श्रेष्ठ माना गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इस तिथि के दिन संयोगवश सोमवार भी तो प्राणी मात्र के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है। इस महापुण्यदायक तिथि के दिन हमारी वाणी के द्वारा किसी के लिए अशुभ शब्द न निकले इसका सदैव ध्यान रखना चाहिए। उसका कारण यह है कि इस दिन मन, कर्म तथा वाणी के द्वारा भी किसी के लिए अशुभ नहीं सोचना चाहिए।

सोमवती अमावस्या प्राणी को अपना प्रारब्ध सुधार ने एवं भाग्य प्रखर करने का सुनहरा अवसर है इसलिए अपनी शक्ति-सामर्थ्य के अनुसार इस दिन दान, पुण्य तथा जप करने चाहिए। यदि आप किसी भी तीर्थ नदी और समुद्र आदि में जाने में किसी भी कारण से असमर्थ हैं तो अपने घर में ही प्रात:काल दैनिक कर्मों से निवृत होकर स्नान अवश्य करें। झूठ बोलने, छल अथवा कपट आदि करने से बचें। 


जरुरतमंद विद्यार्थी को दान में पुस्तकें, भूखों को अन्न-भोजन आदि, गौ को हरा चारा, कन्या दान हेतु आर्थिक मदद, गरीबों को वस्त्र, तथा अन्य उपयोगी वस्तुएं अपनी शक्ति-सामर्थ्य के अनुसार दान करें। ऐसा करने से प्राणी को सभी प्रकार के भोगों एवं ऐश्वर्यों की प्राप्ति तो होती ही है। सतयुग में तप से, द्वापर में श्रीहरि की भक्ति से, त्रेता में ब्रह्मज्ञान और कलियुग में दान से मिले हुए पुण्य के बराबर फल सोमवती अमावस्या को प्राप्त होता है।  

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed