Som Pradosh Vrat: वास्तु दोष दूर करने के लिए करें शिव पूजा से जुड़े ये अचूक उपाय
सोम प्रदोष व्रत 24 मई को रखा जाएगा। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल यानि संध्या के समय सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले आरंभ कर दी जाती है
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विशेष रूप से सोमवार और प्रदोष तिथि दोनों को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए बेहद फलदाई माना जाता है। इस बार सोम प्रदोष व्रत 24 मई को रखा जाएगा। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल यानि संध्या के समय सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले आरंभ कर दी जाती है। इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से लम्बी आयु का वरदान प्राप्त होता है।
प्रदोष पूजा का फल
श्रीलिंग पुराण के अनुसार शिवलिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य में तीनों लोकों के ईश्वर श्रीविष्णु तथा ऊपरी भाग में प्रणवसंज्ञक महादेव रूद्र सदाशिव विराजमान रहते हैं। लिंग की वेदी महादेवी अम्बिका हैं,वे (सत,रज,तम) तीनों गुणों से तथा त्रिदेवों युक्त रहती हैं। जो प्राणी सोम प्रदोष के दिन प्रदोषकाल में उस वेदी के साथ लिंग की पूजा करता है वह शिव-पार्वती की कृपा सहजता से प्राप्त कर लेता है। जिनको क्रोध अधिक आता हो,तनाव में रहते हों,मानसिक रोग हों और स्वास्थ्य से भी कमज़ोर हों उन्हें इस दिन शिव आराधना शुभ फलदायक होती है।धार्मिक मान्यता यह है कि इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान के बाद भक्ति भाव और विधि-विधान से भगवान शिव का पूजन एवं अभिषेक करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं,उन्हें किसी तरह का कोई भय नहीं रहता। विवाहित महिलाओं को अपने सौभाग्य में वृद्धि के लिए तथा अविवाहित कन्याओं को शीघ्र विवाह तथा गुणवान पति पाने की अभिलाषा के साथ सोम प्रदोष में व्रत रखना तथा भगवान शिव का अभिषेक करना विशेष रूप से लाभदायक होता है।
शिव पूजा से वास्तुदोष निवारण
भगवान शिव ऐसे देव हैं जिनकी पूजा-आराधना एवं मंत्र ध्वनि से भवन में स्थित वास्तुदोषों का शमन होता है,जीवन में सुख-शांति आती है। वास्तुदोष के कारण उत्पन्न परेशानियों को दूर करने के लिए इस सोम प्रदोष पर कुछ वास्तु के सरल उपाय करने से भगवान भोलेनाथ की कृपा आपके ऊपर बनी रहेगी।
- वास्तु दोषों से उत्पन्न अकारण भय,परेशानी आदि के निवारण के लिए तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रुद्राष्टकम का पाठ किया जाना सकारात्मक परिणाम देगा।
- घर की नकारात्मक शक्तियों को दूर करने के लिए इस दिन शिवलिंग पर अभिषेक करने के उपरान्त जलहरी के जल को घर लाकर उससे 'ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवाय ' ये मंत्र जपते हुए पूरे भवन में छिड़काव करना चाहिए।
- यदि आपके कार्यों में बहुत अड़चन आती हैं या आपसी कलह,रोग आदि से परेशान हैं तो इन तकलीफों को दूर करने के लिए घर के उत्तर-पूर्व या ब्रह्म स्थान में रुद्राभिषेक करना शुभ परिणाम देगा।
- आर्थिक तंगी को दूर करने एवं घर की खुशहाली बनाए रखने के लिए घर की पूर्व या उत्तर-पश्चिम (वायव्य)दिशा में बिल्व का पेड़ लगाएं और उसमें नियमित रूप से जल देते रहें एवं शाम के समय इसके नीचे घी का दीपक जलाएं। बिल्व का वृक्ष स्वयं शिव का ही स्वरुप है अतः ध्यान रहे कि पेड़ के आस-पास किसी प्रकार की गंदगी नहीं रहे एवं यह सूखने न पाए।
- उत्तर-पूर्व दिशा ईश यानि शिवजी की दिशा मानी गई है,सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में वृद्धि एवं परिवार में एकता के लिए यहाँ शिव परिवार की तस्वीर लगाने से शुभ फलों में वृद्धि संभव है।