फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Skand Shashthi 2024 Date Tithi Puja Muhurat Yog Upay and Significance

Skand Shashthi 2024: संतान की उन्नति के लिए स्कंद षष्ठी व्रत आज, जानें तिथि और पूजा मुहूर्त

Thu, 11 Jul 2024 11:25 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 11 Jul 2024 11:25 AM IST
सार

शास्त्रों में आषाढ़ माह में पड़ने वाली स्कंद षष्ठी का बहुत महत्व माना गया है। स्कंद षष्ठी, जिसे षष्ठी व्रत और कुमार षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है इस बार यह व्रत 11 जुलाई को ही रखा जाएगा।

विज्ञापन
Skand Shashthi 2024 Date Tithi Puja Muhurat Yog Upay and Significance
स्कंद षष्ठी व्रत का महत्व - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Skand Shashthi 2024: भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की पूजा हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को की जाती है। शास्त्रों में आषाढ़ माह में पड़ने वाली स्कंद षष्ठी का बहुत महत्व माना गया है। स्कंद षष्ठी, जिसे षष्ठी व्रत और कुमार षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है इस बार यह व्रत 11 जुलाई को ही रखा जाएगा। विशेषरूप से इस दिन भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की पूजा की जाती है।
विज्ञापन


देवताओं के सेनापति हैं कार्तिकेय
दक्षिण भारत में पूजे जाने वाले प्रमुख देवताओं में से एक भगवान कार्तिकेय शिव-पार्वती के पुत्र हैं। भगवान स्कंद शक्ति के अधिदेव हैं। कार्तिकेय को सुब्रमण्यम, मुरुगन और स्कंद भी कहा जाता है एवं ये देवताओं के सेनापति भी कहे जाते हैं।
विज्ञापन


पूजाविधि और व्रत के नियम
स्कंद षष्ठी पर भगवान शिव और पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल पर भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।इसके बाद दीपक जलाएं एवं भगवान कार्तिकेय को फल, फूल, मिठाई और नैवेद्य चढ़ाएं और षष्ठी व्रत की कथा सुनें। इस दिन विशेष कार्य की सिद्धि के लिए कि गई पूजा-अर्चना फलदायी होती है। इस दिन मांस, शराब, प्याज, लहसुन का त्याग करना चाहिए। इस दिन संयम से भी रहना आवश्यक है। भगवान कार्तिकेय के मंत्र "ओम षडानन स्कंदाय नमः" का 108 बार जाप करें।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्कंद षष्ठी व्रत का महत्व
स्कंद पुराण के नारद-नारायण संवाद में संतान प्राप्ति और संतान की पीड़ाओं को दूर करने वाले इस व्रत का विधान बताया गया है। स्कंद षष्ठी का व्रत करने से योग्य संतान एवं मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। भगवान कार्तिकेय का ये व्रत करने से दुश्मनों पर जीत मिलती है। वहीं हर तरह की परेशानियां भी दूर हो जाती हैं। पुराणों के अनुसार स्कंद षष्ठी की उपासना से च्यवन ऋषि को आँखों की ज्योति प्राप्त हुई।

Guru Pradosh Vrat 2024: जुलाई का आखिरी प्रदोष व्रत कब है ? जानें तिथि पूजा विधि और उपाय

पौराणिक कथा
भगवान कार्तिकेय की जन्म कथा के विषय में पुराणों में ज्ञात होता है कि जब दैत्य तारकासुर  का अत्याचार  चारों ओर फैल रहा था तब देवताओं को भी पराजय का समाना करना पड़ा । जिस कारण सभी देवता भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचते हैं और अपनी रक्षार्थ उनसे प्रार्थना करते हैं। ब्रह्मा उनके दु:ख को जानकर उनसे कहते हैं कि तारकासुर का अंत भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही संभव है, परंतु सती के अंत के पश्चात् भगवान शिव गहन साधना में लीन हुए रहते हैं। इंद्र और अन्य देव भगवान शिव के पास जाते हैं, तब भगवान शिव उनकी पुकार सुनकर पार्वती से विवाह करते हैं। शुभ घड़ी और शुभ मुहूर्त में शिव जी और पार्वती का विवाह हो जाता है। इस प्रकार कार्तिकेय का जन्म होता है और कार्तिकेय तारकासुर का वध करके देवों को उनका स्थान प्रदान करते हैं। देवताओं के अनुरोध पर कार्तिकेय उनके सेनापति बने।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed