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Shattila Ekadashi 2019: षटतिला एकादशी व्रत के दिन तिल का उपयोग करने से दूर होता है दुर्भाग्य
Thu, 31 Jan 2019 10:44 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 31 Jan 2019 10:44 AM IST
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एकादशी व्रत पूजा
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माघ महीने का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। इस महीने में स्नान, ध्यान, तप और दान करने से व्यक्ति को पापो से मुक्ति मिलती है। माघ महीने में कृष्ण पक्ष में पड़ने एकादशी को षटतिला एकादशी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 31 जनवरी गुरुवार के दिन है। पद्म पुराण में इस एकादशी का महत्व का वर्णन करते हुए कहा गया है इस दिन उपवास कर स्नान और तिल का दान करना चाहिए।
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ऐसे करें षटतिला एकादशी व्रत पूजा
जो लोग षटतिला एकादशी का व्रत रखना चाहते हैं उन्हें प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर नित्यक्रिया के बाद तिल का उबटन लगाकर पानी में तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
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इसके बाद भगवान श्री कृष्ण को तिल का प्रसाद अर्पित करें और तिल से ही हवन करें। इस एकादशी के व्रत में तिल का दान करना उत्तम बताया गया है। जल पीने की इच्छा हो तो जल में तिल मिलाकर पिएं।
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जो लोग व्रत नहीं कर सकते हैं उनके लिए जितना संभव हो तिल का उपयोग करें। तिल खाएं, तिल मिला हुआ पानी पिएं। तिल का उबटन लगाकर स्नान करें और तिल का दान भी करें। अगर इतना सबकुछ करना संभव नहीं हो तो सिर्फ तिल का उच्चारण ही करें तो भी पाप कर्मों के अशुभ प्रभाव में कमी आएगी।
षटतिला एकादशी का महत्व
पृथ्वी पर कर्म से ही हमारे पाप और पुण्य का लेखा-जोखा तैयार होता है। श्री कृष्ण ने कहा कि संसार में कोई भी जीव एक पल भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता है। इसलिए जाने अनजाने कभी न कभी हम सभी पाप कर्म कर बैठते हैं। और पाप कर्मों से मुक्ति के लिए भी कर्म करना पड़ता है।
शास्त्रों में कई ऐसे उपाय यानी कर्म बताए गये हैं जिनसे पाप कर्मों के प्रभाव से मुक्ति मिल सकती है। ऐसा ही एक कर्म है माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत। इस एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। अपने नाम के अनुसार इस एकादशी में छः प्रकार से तिल का उपयोग करना श्रेष्ठ बताया गया है।