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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Shardiya Navratri 2022 Things to Do on Ashtami and Navami for Happiness and Prosperity Grace from Maa Bhagwati

Navratri 2022: जानें अष्टमी-नवमी तिथि पर देवी को प्रसन्न करने के लिए क्या करें और क्या नहीं

Mon, 03 Oct 2022 12:01 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 03 Oct 2022 12:01 AM IST
सार

मां महागौरी धन,वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। अष्टमी तिथि के दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात कलश पूजन करके मां की विधि-विधान से पूजा करें। इस दिन मां को सफेद पुष्प अर्पित करें,मां की वंदना मंत्र का उच्चारण करें।

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Shardiya Navratri 2022 Things to Do on Ashtami and Navami for Happiness and Prosperity Grace from Maa Bhagwati
Durga Ashtami 2022: अष्टमी के दिन कन्याओं के पूजन का विधान है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। - फोटो : iStock

विस्तार

03 अक्तूबर, सोमवार को महाअष्टमी का पर्व है। इस दिन नवरात्रि के आठवें दिन यानी अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मां दु्र्गा की विशेष पूजा करने का विधान है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दु्र्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन, भोजन और हवन करने का विशेष महत्व होता है। पौराणिक मान्यता है कि इस तिथि पर देवी की पूजा करने पर हर तरह के कष्ट और आर्थिक परेशानियां दूर हो जाती हैं। अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए अनेक प्रकार के मंत्रो और विधि-विधान से पूजा की जाती है। अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा की उपासना और साधना के दौरान सुख,समृद्धि,कीर्ति,विजय और आरोग्यता की कामना करनी चाहिए। धन और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए अष्टमी तिथि पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

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नवरात्रि पर अष्टमी तिथि पर की उपासना का महत्व-
मां महागौरी धन,वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। अष्टमी तिथि के दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात कलश पूजन करके मां की विधि-विधान से पूजा करें। इस दिन मां को सफेद पुष्प अर्पित करें,मां की वंदना मंत्र का उच्चारण करें। अष्टमी तिथि पर मां को हलुआ,पूरी,सब्जी,काले चने एवं नारियल का भोग लगाएं। 
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कन्या पूजन-
भक्तों के लिए यह देवी अन्नपूर्णा का स्वरुप हैं इसलिए अष्टमी के दिन कन्याओं के पूजन का विधान है।अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन 10 साल तक  की कन्याओं को घर बुलाकर उन्हें आदर पूर्वक सात्विक और सुमधुर भोजन कराएं एवं उन्हें जरूरत की चीजें भेंट करें, ऐसा करने से देवी मां का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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श्रृंगार की वस्तुएं भेंट दें-
महाअष्टमी के दिन देवी माता के मंदिर में या फिर किसी सुहागिन महिला को लाल रंग की साड़ी और श्रृंगार का सामान भेंट देने से घर में सुख-सौभाग्य आता है।

दीप जलाएं-
महाअष्टमी के दिन तुलसी के पास शुद्ध घी का दीपक जलाएं इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर सुख समृद्धि का वास होता है।

क्या नहीं करें-
-अष्टमी के दिन माता की पूजा करने के बाद दिन में सोना नहीं चाहिए।  
-यदि आपने घर में मां दुर्गा की अखंड ज्योति जलाई है तो घर खाली नहीं छोड़ना चाहिए।
-इस दिन अपनी दाढ़ी-मूंछ या बाल नहीं कटवाने चहिए। 
-कन्या,सृष्टि सृजन श्रृंखला का अंकुर होती है। यह पृथ्वी पर प्रकृति स्वरुप माँ शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। 
-कभी भी कन्याओं और स्त्रियों का अपमान नहीं करें।

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