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Shardiya Navratri 2020: मां भवानी का यह शक्तिपीठ तांत्रिक पूजा के लिए है प्रसिद्ध

Thu, 22 Oct 2020 07:19 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 22 Oct 2020 07:19 AM IST
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Shardiya Navratri 2020 history of kamakhya temple in Assam
कामाख्या मंदिर - फोटो : Social media

नवरात्रि के पावन पर्व पर मां भवानी के शक्तिपीठों पर भक्तों की भारी भी़ड़ देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु ने भगवान शिव जी का माता सती के शव से मोह भंग करने के लिए मां के शरीर के कई टुकड़े किए थे। जहां-जहां माता के शरीर के भाग और आभूषण गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ बन गए। ऐसा ही शक्ति पीठ है जो तांत्रिक साधना के लिए विश्व प्रसिद्ध है। आइए जानते हैं इसके बारे में  

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Shardiya Navratri 2020 history of kamakhya temple in Assam
कामख्या मंदिर

असम के नीलांचल पर्वत पर समुद्र तल से करीब 800 फीट की ऊंचाई पर यहां देवी का एक मंदिर है जिसे कामख्या देवी मंदिर कहते हैं। देवी के 51 शक्तिपीठों में से यह भी एक है। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने जब देवी सती के शव को चक्र से काटा तब इस स्थान पर उनकी योनी कट कर गिर गयी।

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Shardiya Navratri 2020 history of kamakhya temple in Assam
कामाख्या मंदिर - फोटो : ANI

इसी मान्यता के कारण इस स्थान पर देवी की योनी की पूजा होती है। प्रत्येक वर्ष तीन दिनों के लिए यह मंदिर पूरी तरह से बंद रहता है। माना जाता है कि माँ कामाख्या इस बीच रजस्वला होती हैं। और उनके शरीर से रक्त निकलता है। इस दौरान शक्तिपीठ की अध्यात्मिक शक्ति बढ़ जाती है। इसलिए देश के विभिन्न भागों से यहां तंत्रिक और साधक जुटते हैं। आस-पास की गुफाओं में रहकर वह साधना करते हैं।

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मां कामाख्या - फोटो : अमर उजाला

चौथे दिन माता के मंदिर का द्वार खुलता है। माता के भक्त और साधक दिव्य प्रसाद पाने के लिए बेचैन हो उठते हैं। यह दिव्य प्रसाद होता है लाल रंग का वस्त्र जिसे माता राजस्वला होने के दौरान धारण करती हैं। माना जाता है वस्त्र का टुकड़ा जिसे मिल जाता है उसके सारे कष्ट और विघ्न बाधाएं दूर हो जाती हैं।

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कामख्या

माता की शक्ति में जो लोग विश्वास करते हैं वह भी यहां आकर अपने को धन्य मानते हैं। जिन्हें ईश्वरीय सत्ता पर यकीन नहीं है वह भी यहां आकर माता के चरणों में शीश झुकाते हैं और देवी के भक्त बन जाते हैं।

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