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Sawan Pradosh Vrat 2024: सावन के अंतिम प्रदोष व्रत पर इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा

Tue, 13 Aug 2024 06:13 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Tue, 13 Aug 2024 06:13 PM IST
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Sawan Pradosh Vrat 2024 puja vidhi and shubh yog know shiv puja vidhi in hindi
Sawan Pradosh Vrat 2024 - फोटो : अमर उजाला

Sawan Pradosh Vrat 2024: प्रेम और हरियाली का प्रतीक माने जाने वाले सावन माह का समापन 19 अगस्त 2024 को हो रहा है। इस माह का प्रत्येक दिन शिव पूजा को समर्पित है। इस दौरान आने वाले प्रदोष व्रत को शिव जी की विशेष पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत पर शंकर जी की पूजा अर्चना करने से मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होती हैं।

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इस साल सावन माह का अंतिम प्रदोष व्रत 17 अगस्त 2024 को रखा जा रहा है। ये व्रत सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन दिन प्रीति योग का निर्माण होगा। ये योग प्रात: काल से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग प्रारंभ हो जाएगा, जो 18 अगस्त सुबह 7 बजकर 51 मिनट तक रहने वाला है। इन योग में देवों के देव महादेव की पूजा करने से सभी समस्याओं का समाधान होता है। इसी कड़ी में आइए भगवान शिव की पूजा विधि के बारे में जान लेते हैं।

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प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन सुबह ही स्नान कर लेना चाहिए। फिर साफ वस्त्रों को धारण करें। इसके बाद भगवान शिव की विधि अनुसार पूजा करें। फिर प्रदोष काल में पूजा स्थान पर चौकी लगाएं। चौकी पर महादेव की पूरे परिवार के साथ तस्वीर स्थापित करें। अब सबसे पहले शंकर जी को चंदन का तिलक लगाएं। फिर गणेश जी को चंदन और माता पार्वती को सिंदूर का तिलक लगाएं। इसके बाद शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें। अब भोलेनाथ के मंत्रों का जाप करते हुए घी की दीपक जलाएं। फिर मिष्ठान का भोग लगाएं। अंत में शिव चालीसा का पाठ करें। इस दौरान जरूरतमंदों को दान करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।


भगवान शिव की आरती 
जय शिव ओंकारा ऊँ जय शिव ओंकारा । 
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। 
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। 
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी। 
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। 
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । 
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। 
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी। 
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । 
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
जय शिव ओंकारा हर ऊँ शिव ओंकारा। 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ऊँ जय शिव ओंकारा...॥  

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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