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Sawan Mangala Gauri Vrat 2024: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानिए पूजा-विधि और महत्व

Tue, 23 Jul 2024 06:24 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 23 Jul 2024 06:24 AM IST
सार

Sawan Mangala Gauri Vrat 2024: मंगला गौरी व्रत का उल्लेख विभिन्न पुराणों और शास्त्रों में मिलता है। इसे करने से देवी गौरी, जो मां पार्वती का एक ही एक रूप हैं की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत को करने वाली महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, परिवार की समृद्धि और सुख-शांति की कामना करती हैं।

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Sawan Mangala Gauri Vrat 2024 Date Muhurat Importance Upay and Follow Remedies for Mangal Dosh
Mangla Gauri Vrat 2024: मंगला गौरी व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Sawan Mangala Gauri Vrat 2024: सावन माह पहला मंगला गौरी व्रत आज यानी 23 जुलाई, मंगलवार के दिन रखा जा रहा है। सावन का महीना हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इस महीने के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत पर मुख्य रूप से माता पार्वती की उपासना की जाती है। यह व्रत मुख्यतः विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से देवी पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है।
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मंगला गौरी व्रत का महत्व
मंगला गौरी व्रत का उल्लेख विभिन्न पुराणों और शास्त्रों में मिलता है। इसे करने से देवी गौरी, जो मां पार्वती का एक ही एक रूप हैं की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत को करने वाली महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, परिवार की समृद्धि और सुख-शांति की कामना करती हैं। यह व्रत विशेषकर नवविवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बनाए रखने में सहायक होता है।इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।मंगला गौरी व्रत के दिन गरीबों और जरूरतमंदों में लाल मसूर की दाल और लाल वस्त्र आदि दान करने चाहिए। इससे कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और साधक को मंगल दोष के बुरे प्रभावों से भी मुक्ति मिलती है।
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मंगला गौरी व्रत पूजा विधि
सबसे पहले प्रातःकाल स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। देवी गौरी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। फिर घर के मंदिर या पूजा स्थान को स्वच्छ करें और वहां पर देवी गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा के लिए जल, चंदन, अक्षत (चावल), फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), और वस्त्र तैयार करें। मां पार्वती को लाल रंग के वस्त्र और सुहाग का सामान अर्पित करते हुए विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं एवं आरती करें । इस बात ध्यान रखें कि पूजा के लिए सभी सामग्रियों जैसे पान, सुपारी, लौंग, इलायची, फल, पान, लड्डू सुहाग की सामग्री और चूड़ियां आदि की संख्या 16 होनी चाहिए। पूजा सामग्रियों को अर्पित करने के बाद मंगला गौरी की व्रत कथा सुनें। पूजा के बाद पति की लंबी आयु और सुखमय दांपत्य जीवन की कामना करें।

 मंत्र:-
"ॐ श्री गौरी शंकराय नमः"
"ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं गौरी मंगला याय नमः"


व्रत के नियम
व्रत का संकल्प लेकर दिनभर संयमित रहें और सात्विक आहार ग्रहण करें। शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखें। पूजा विधि का पूर्णतः पालन करें और ध्यानपूर्वक मंत्रों का जाप करें।काले और नीले रंग के वस्त्र न पहनें।  भोग अर्पित करने के बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करें।व्रत के दिन जरूरतमंदों को दान करें और उनकी सेवा करें।
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