Shivling Par Jal Chadhane Ki Sahi Vidhi: सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव का जल से अभिषेक किया जाता है। इससे भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, अमृत मंथन के समय निकले विष को पीने के बाद भगवान शिव पर जब विष का प्रभाव शुरू हुआ तब इसे कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने जल से भोलेनाथ का अभिषेक किया। तभी से भगवान शिव को जल अर्पित किया जाने लगा। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान भोलेनाथ जलाभिषेक से महादेव प्रसन्न होते हैं। लेकिन आपको इस बात का ध्यान देने की आश्यकता है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करने का भी नियम होता है। अक्सर भक्त भगवान भोलेनाथ लोटे में पानी भरकर सीधे शिवलिंग पर चढ़ा देते हैं या फिर पानी की तेज धारा शिवलिंग पर चढ़ा देते हैं। इस तरह से शिव शंभू को जल चढ़ाना गलत माना जाता है। आइए जानते हैं शिवलिंग का जलाभिषेक करने का सही नियम क्या है।
Sawan 2024 Jalabhishek Niyam: सावन के महीने में शिवलिंग पर करते हैं जलाभिषेक, जानें सही विधि और नियम
शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही विधि
शिवलिंग पर जल अभिषेक करने से पूर्व व्यक्ति स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद जल का आचमन करके स्वयं की शुद्धि करें। इसके बाद शिवलिंग या शिव जी का जलाभिषेक करें।
जलाभिषेक का अर्थ- भगवान भोलेनाथ या शिवलिंग को जल अर्पित करना जलाभिषेक कहलता है। जलाभिषेक के लिए आप साफ जल, गंगाजल या अन्य पवित्र नदियों के जल का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो शिवलिंग पर कच्चा दूध, गन्ने का रस, तेल आदि भी अर्पित कर सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि जलाभिषेक और रुद्राभिषेक अलग-अलग हैं।
जलाभिषेक की विधि?
- शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए एक साफ बर्तन लेंऔर उसमें पवित्र जल में गंगाजल मिलाकर भरें।
- फिर शिवलिंग के पास जाएं और पूर्व या उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण की ओर मुख करें।
- फिर लोटे या कलश को दोनों हाथों से पकड़ें, और धीरे धीरे पानी की एक पतली धार शिवलिंग पर अर्पित करें। याद रखें कि पानी की धार तेज नहीं होनी चाहिए।
- इस दौरान भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र ॐ नाम शिवाय का जाप करते रहना चाहिए।
- सीधे खड़े होकर जलाभिषेक न करें।
- यदि आप तेज गति से जलाभिषेक करने या खड़े होकर जलाभिषेक करने से उसकी बूंदें आपके पैरों पर पड़ सकती हैं, जो अच्छा नहीं माना जाता है।
- यह उचित नहीं है कि जिस जल से आप भगवान का अभिषेक करने आए हैं वह जल आपके पैरों पर गिरे।
- जलाभिषेक करने के बाद भगवान भोलेनाथ को प्रणाम करें।
- बेलपत्र, सफेद चंदन, अक्षत्, शहद, फूल, धूप, दीप, गंध आदि से शिव जी की पूजा करें।
- शिव चालीसा का पाठ करें और आरती उतारें।
- इसके बाद शिवलिंग की आधी परिक्रमा करें।
- अंत में महादेव से अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें, ताकि अपके कार्य सफल हों।