फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   sawan 2024 The significance of Bel Patra in hindu rituals know benefits of it

Sawan 2024: भगवान शिव को क्यों प्रिय है बेलपत्र ? जानें इसे चढ़ाने के नियम और कथा

Wed, 24 Jul 2024 03:15 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Wed, 24 Jul 2024 03:15 PM IST
विज्ञापन
sawan 2024 The significance of Bel Patra in hindu rituals know benefits of it
भगवान शिव को क्यों प्रिय है बेलपत्र ? - फोटो : अमर उजाला

Sawan 2024: भोलेनाथ के प्रिय माह सावन की शुरुआत 22 जुलाई 2024 से चुकी है। ये माह शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन में आने वाले सभी सोमवार को व्रत रखने का विधान है। इस दौरान पूजा में महादेव की पसंदीदा चीजें शामिल करने से सपूंर्ण फल की प्राप्ति होती हैं।

विज्ञापन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र को जरूर शामिल करना चाहिए, ये उन्हें बहुत प्रिय है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि सावन मास ही नहीं बल्कि प्रदोष और सोमवार के व्रतों में भी महादेव को बेलपत्र चढ़ाना चाहिए।

विज्ञापन

 

शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से शंकर जी की शीतलता भी प्राप्त होती है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव को बेलपत्र क्यों प्रिय है? आखिर क्यों उनकी पूजा में इसे शामिल किया जाता है। अगर नहीं तो आइए इस लेख के माध्यम से जान लेते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

भगवान शिव को बेलपत्र क्यों प्रिय है ?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान कालकूट नाम का विष निकला था। इस विष के प्रभाव से सभी देवता व्याकुल होने लगे थे। विष के प्रभाव से सृष्टि को बचाने के लिए सभी देवताओं ने शिव जी से प्रार्थना की। ये प्रार्थना सुनकर देवों के देव महादेव ने इस विष को अपनी हथेली पर रखकर पी लिया था। माना जाता है कि विष के प्रभाव से खुद को बचाने के लिए महादेव ने इसे अपने कंठ में ही रख लिया था। लेकिन इसे पीने के बाद भोलेनाथ का कंठ नीला पड़ गया, इसलिए उन्हें 'नीलकंठ' कहा जाने लगा।

वहीं विष के प्रभाव और तीव्र ज्वाला से शंकर जी का मस्तिष्क गरम हो गया। महादेव के मस्तिष्क की गरमी को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने उन पर जल उड़ेलना शुरू कर दिया। इस दौरान ठंडी तासीर होने की वजह से बेलपत्र को भी चढ़ाया गया। तभी से ऐसी मान्यता है कि बेलपत्र और जल से पूजा करने वाले शिव भक्तों पर शिव जी अपनी कृपा बरसाते हैं। साथ ही व्यक्ति सौभाग्यशाली बनता है।

बेलपत्र अर्पण के नियम
 

  • शिव पूजा में हमेशा एक साथ जुड़ी हुई तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही शामिल करना चाहिए।
  • इस दौरान ध्यान रखें कि बेलपत्र की पत्तियों में छेद नहीं होना चाहिए। साथ ही ये कटी हुई भी न हो।
  • बेलपत्र कभी बासी नहीं होता है। आप इसे धोकर फिर से चढ़ा सकते हैं।
  • माना जाता है कि शिव जी को कभी भी सिर्फ बिल्वपत्र अर्पण नहीं करें, आप साथ में जल की धारा भी जरूर चढ़ाएं।


महादेव को ऐसे चढ़ाएं बेलपत्र
 

  • शिव जी को तिलक लगाएं।  
  • फिर आप बेलपत्र, भांग, धतूरा और फल फूल आदि सब अर्पित करें।
  • वहीं बेलपत्र चढ़ाने के बाद जल से अभिषेक करें।
  • इसके बाद शिव जी के समक्ष दीप जलाएं।
  • फिर भोलेनाथ को खीर का भोग लगाएं।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed