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Sawan 2025: भोलेनाथ का वाहन नंदी कैसे बने भगवान शिव की सवारी? जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा

Wed, 25 Jun 2025 11:14 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 25 Jun 2025 11:14 AM IST
सार

Sawan 2025: सावन का महीना भगवान शिव की पूजा-आराधना के लिए बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। इस माह में हर दिन और खासतौर पर सावन सोमवार के दिन भोले नाथ की पूजा के साथ नंदी महाराज की पूजा होती है। 

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Sawan 2005 How did Nandi become Lord Shiva vehicle Know the mythological story
भगवान शिव की मूर्ति स्थापित की जाती है, उनके गण नंदी महाराज सदैव सामने विराजमान रहते हैं। - फोटो : एक्स/@yogiraj_arun

विस्तार

Sawan 2005: जल्द ही सावन का पवित्र महीना शुरू होने वाला है। सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है। इस माह में भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा-आराधना और जलाभिषेक किया जाता है। भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ नंदी देव की भी पूजा-अर्चना होती है। अक्सर हम देखते हैं कि नंदी की प्रतिमा शिव परिवार के साथ या कुछ दूरी पर मंदिर के बाहर होती है। मंदिर में जहां भी भगवान शिव की मूर्ति स्थापित की जाती है, उनके गण नंदी महाराज सदैव सामने विराजमान रहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस प्रकार भगवान शिव के दर्शन और पूजन का महत्व है, उसी प्रकार नंदी के दर्शन करने से भी पुण्य प्राप्त होता है।

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1. शिलाद मुनि की तपस्या और पुत्र प्राप्ति की कथा
शिलाद मुनि के ब्रह्मचारी हो जाने के कारण वंश समाप्त होता देख उनके पितरों को चिंता सताने लगी। मुनि योग और तप में व्यस्त रहने के कारण गृहस्थ आश्रम नहीं अपनाना चाहते थे, मगर अपने पितरों की चिंता भी उनसे नहीं देखी जा रही थी। शिलाद मुनि ने अपनी तपस्या से इंद्र देवता को प्रसन्न करके उनसे जन्म और मृत्यु से हीन पुत्र प्राप्ति का वरदान मांगा। लेकिन इंद्र ने ऋषि को बताया कि वह ऐसा वरदान देने में अक्षम हैं और उन्हें शिवजी की तपस्या करनी चाहिए, क्योंकि जन्म-मृत्यु से मुक्त होने का वरदान देने का अधिकार केवल शिवजी को है।
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2. नंदी का जन्म और शिवभक्ति
भगवान शिव की महिमा से ऋषि शिलाद को पुत्र प्राप्त हुआ, जिसका नाम 'नंदी' रखा गया। भगवान शंकर ने मित्र और वरुण नाम के दो मुनि शिलाद के आश्रम में भेजे, जिन्होंने नंदी के अल्पायु होने की बात कही। नंदी को जब यह ज्ञात हुआ तो वह महादेव की आराधना से मृत्यु को जीतने के लिए वन में चला गया।
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3. नंदी को भगवान शिव द्वारा दिया गया वरदान
दिन-रात तपस्या करने के बाद नंदी को भगवान शिव ने दर्शन दिए। शिवजी ने नंदी से उसकी इच्छा पूछी, तो नंदी ने कहा कि मैं पूरी उम्र सिर्फ आपके साथ ही रहना चाहता हूं। शिवजी ने उसे गले लगा लिया और नंदी को बैल का चेहरा दिया तथा उसे अपने वाहन, अपना मित्र, और अपने गणों में सबसे उत्तम रूप में स्वीकार कर लिया। साथ ही नंदी को अमर होने का वरदान भी प्रदान किया। शिवजी ने यह भी कहा कि जब भी उनकी कोई प्रतिमा स्थापित की जाएगी, तो उसके सम्मुख नंदी का होना अनिवार्य होगा, वरना वह प्रतिमा अधूरी मानी जाएगी।

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4. नंदी के कान में कही गई मनोकामना होती है पूरी
नंदी के दर्शन मात्र से ही मन को असीम शांति प्राप्त होती है। मान्यता है कि शिवजी अधिकतर अपनी तपस्या में लीन रहते हैं। भगवान शिव की तपस्या में किसी प्रकार का विघ्न न पड़े, इसलिए नंदी चैतन्य अवस्था में रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर अपनी मनोकामना नंदी के कानों में कही जाए, तो वे भगवान शिव तक उसे जरूर पहुंचाते हैं। फिर वह नंदी की प्रार्थना बन जाती है, जिसे भगवान शिव अवश्य पूरी करते हैं। यह भी माना जाता है कि शिवजी ने नंदी को यह वरदान स्वयं दिया था कि जो भक्त निश्छल मन से तुम्हारे कान में अपनी मनोकामना कहेंगे, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होंगी।

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