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sakat chauth 2019 : सौभाग्य और लंबी आयु देता है यह व्रत, जानें संकष्टी चतुर्थी व्रत की विधि एवं कथा
Wed, 23 Jan 2019 06:33 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 23 Jan 2019 06:33 PM IST
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सकट चौथ व्रत 2019
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माघ महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को गणेश चौथ, तिलकुटा चौथ या फिर कहें सकट चौथ का व्रत किया जाता है। भगवान श्री गणेश की साधना-अराधना के माध्यम से यह व्रत विशेष रूप से संतान के सौभाग्य और उसकी लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है। महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संकटों को दूर करने के लिए यह व्रत रखती हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत इस बार 24 जनवरी को पड़ेगा।
सकट चौथ पूजन व्रत विधि
सकट चौथ के दिन महिलाएं प्रात:काल स्नान के पश्चात ऋद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश जी की पूजा करती हुई पूरे दिन निर्जल व्रत रखती हैं। इसके बाद शाम को गणेश जी विधि-विधान से पूजन एवं फल-फूल, तिल, गुड़ आदि अर्पित किया जाता है। गणेश जी की पूजा में दूब चढ़ाना नहीं भूलें। गणपति के सामने दीपक जलाकर गणेश जी के मंत्र का जाप करें। चंद्रमा के उदय के बाद नीचे की ओर देखते अर्घ्य दें।
पूजा का शुभ मुहूर्त
सकट चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात ही पूरा होता है, इसलिए 24 जनवरी 2019 को रात्रि 09:31 पर चंद्रमा उदय के पश्चात् चंद्र को अर्घ्य और गणेश जी का विधि-विधान से पूजन करें।
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क्या नहीं करें
सकट चौथ के व्रत में मूली का सेवन नहीं किया जाता है।
सकट चौथ व्रत कथा
कहते हैं कि सतयुग में राजा हरिश्चंद्र के राज्य में एक कुम्हार था। एक बार तमाम कोशिशों के बावजूद जब उसके बर्तन कच्चे रह जा रहे थे तो उसने यह बात एक पुजारी को बताई। उस पर पुजारी ने बताया कि किसी छोटे बच्चे की बलि से ही यह समस्या दूर हो जाएगी। इसके बाद उस कुम्हार ने एक बच्चे को पकड़कर आंवा में डाल दिया। वह सकट चौथ का दिन था। काफी खोजने के बाद भी जब उसकी मां को उसका बेटा नहीं मिला तो उसने गणेश जी के समक्ष सच्चे मन से प्रार्थना की। उधर जब कुम्हार ने सुबह उठकर देखा तो आंवा में उसके बर्तन तो पक गए लेकिन बच्चा भी सुरक्षित था। इस घटना के बाद कुम्हार डर गया और राजा के समक्ष पहुंच पूरी कहानी बताई। इसके पश्चात राजा ने बच्चे और उसकी मां को बुलवाया तो मां ने संकटों को दूर करने वाले सकट चौथ की महिमा का वर्णन किया। तभी से महिलाएं अपनी संतान और परिवार के सौभाग्य और लंबी आयु के लिए व्रत को करने लगीं।
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सकट चौथ पूजन व्रत विधि
सकट चौथ के दिन महिलाएं प्रात:काल स्नान के पश्चात ऋद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश जी की पूजा करती हुई पूरे दिन निर्जल व्रत रखती हैं। इसके बाद शाम को गणेश जी विधि-विधान से पूजन एवं फल-फूल, तिल, गुड़ आदि अर्पित किया जाता है। गणेश जी की पूजा में दूब चढ़ाना नहीं भूलें। गणपति के सामने दीपक जलाकर गणेश जी के मंत्र का जाप करें। चंद्रमा के उदय के बाद नीचे की ओर देखते अर्घ्य दें।
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पूजा का शुभ मुहूर्त
सकट चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात ही पूरा होता है, इसलिए 24 जनवरी 2019 को रात्रि 09:31 पर चंद्रमा उदय के पश्चात् चंद्र को अर्घ्य और गणेश जी का विधि-विधान से पूजन करें।
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क्या नहीं करें
सकट चौथ के व्रत में मूली का सेवन नहीं किया जाता है।
सकट चौथ व्रत कथा
कहते हैं कि सतयुग में राजा हरिश्चंद्र के राज्य में एक कुम्हार था। एक बार तमाम कोशिशों के बावजूद जब उसके बर्तन कच्चे रह जा रहे थे तो उसने यह बात एक पुजारी को बताई। उस पर पुजारी ने बताया कि किसी छोटे बच्चे की बलि से ही यह समस्या दूर हो जाएगी। इसके बाद उस कुम्हार ने एक बच्चे को पकड़कर आंवा में डाल दिया। वह सकट चौथ का दिन था। काफी खोजने के बाद भी जब उसकी मां को उसका बेटा नहीं मिला तो उसने गणेश जी के समक्ष सच्चे मन से प्रार्थना की। उधर जब कुम्हार ने सुबह उठकर देखा तो आंवा में उसके बर्तन तो पक गए लेकिन बच्चा भी सुरक्षित था। इस घटना के बाद कुम्हार डर गया और राजा के समक्ष पहुंच पूरी कहानी बताई। इसके पश्चात राजा ने बच्चे और उसकी मां को बुलवाया तो मां ने संकटों को दूर करने वाले सकट चौथ की महिमा का वर्णन किया। तभी से महिलाएं अपनी संतान और परिवार के सौभाग्य और लंबी आयु के लिए व्रत को करने लगीं।