Sankashti Chaturthi Vrat: संकष्टी चतुर्थी आज, जानें गणपति पूजन विधि एवं चंद्रोदय का समय
आज संकष्टी चतुर्थी है। धार्मिक दृष्टि से यह तिथि भगवान गणेश जी को समर्पित है। सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत प्रथम पूजनीय भगवान श्री गणेश जी की पूजा से की जाती है। गणपति सभी विघ्न बाधाओं को दूर कर अपने साधक के कार्यों को शुभ और संपन्न बनाते हैं। भगवान गणेश को रिद्धि-सिद्धि और बुद्धि का देवता माना जाता है।
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
- संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं और स्नान करके साफ लाल, पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए।
- भगवान गणपति की प्रतिमा पर लाल रंग के कपड़े पहनाएं और भगवान गणेश की पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करना चाहिए।
- भगवान गणपति को लाल गुलाब के फूल चढ़ाएं और उनकी प्रतिमा के सामने दिया जलाएं।
- भगवान गणेश की पूजा में गणेश जी को तिल के लड्डू और मोदक का भोग लगाएं।
संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी पौराणिक कथा
श्री गणेश की प्राकृतिक कथा का वर्णन ब्रह्मपुराण में है। उसमें लिखा है कि मां पार्वती ने अपने देश की मेल से भगवान गणेश का सृजन किया और उन्हें द्वार पर बिठाकर स्नान करने चली गई। तभी वहां उनके पति शिव जी आ गए और गणेश ने मां की आज्ञा अनुसार शिव जी को अंदर नहीं जाने दिया।
इस पर शिवजी क्रोधित हो गए और गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। गणेश जी का सिर चंद्रमा पर जाकर टिक गया। बाद में शिव जी ने नवजात हाथी का सिर गणेश जी को लगा दिया। गणेश जी का सिर चंद्रमा पर सुशोभित हो गया, तभी से चंद्रमा को अर्घ्य देने की मान्यता भी हुई। संकष्टी के दिन चंद्रमा को जल का अर्घ्य दिया जाता है।
आज चंद्रमा का उदय रात्रि 08 बजकर 35 मिनट में होगा।