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रंग पंचमी आज, रंगोत्सव पर्व मनाने पृथ्वी पर आते हैं देवी-देवता, जानें पूजा विधि और मंत्र और आरती

Sun, 08 Mar 2026 07:11 AM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Vinod Shukla Updated Sun, 08 Mar 2026 07:11 AM IST
सार

रंग पंचमी का महत्व के साथ-साथ यह देवी-देवताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी मान्यता है रंग पंचमी के दिन देवी-देवता है न सिर्फ होली खेलते हैं, बल्कि इस दिन राधा-कृष्ण और मां लक्ष्मीजी की विशेष रूप से पूजा होती है। 

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Rang Panchami 2026 Date Significance Shubh Muhurat Puja Vidhi And Mantra Aarti
रंग पंचमी 2026 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Rang Panchami 2026: आज रंग पंचमी का त्योहार है। हिंदू धर्म में इस त्योहार का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि रंग पंचमी पर देवी-देवता सभी पृथ्वी पर आते हैं और भक्तों संग रंगों का उत्सव रंग पंचमी मनाते हैं। इस कारण से इसे देव पंचमी और श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष होली के पांचवें दिन यानी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का त्योहार बड़े ही जोश, उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। रंग पंचमी के साथ ही ब्रज में लगभग 40 दिनों तक चलने वाले रंगोंत्सव पर्व का समापन हो जाता है। आइए जानते हैं 08 मार्च को होने वाले रंग पंचमी पर्व की शुभ तिथि, पूजा विधि समेत सबकुछ। 
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रंग पंचमी तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 07 मार्च 2026 को शाम 7 बजकर 17 मिनट से होगी, जिसका समापन 08 मार्च को रात 09 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। ऐसे में रंग पंचमी का त्योहार 08 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। 
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रंग पंचमी का महत्व 
रंग पंचमी को देवी-देवताओं का पर्व माना जाता है। इसमें सभी देवी-देवता स्वर्गलोक से पृथ्वी पर आते हैं और अपने भक्तों संग होली का त्योहार मनाते हैं। रंग पंचमी का पर्व नकारात्मकता को खत्म करने का प्रतीक होता है। इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। यह त्योहार रंगों के जरिए प्रकृति संग बेहतर संतुलन साधने के त्योहार होता है। 

रंग पंचमी 2026 पूजा विधि
- रंग पंचमी पर विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण, मां लक्ष्मी और राधारानी का पूजन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। 
- रंग पंचमी के दिन विधि-विधान के साथ पूजा करने से सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। 
- इस दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन कर चौकी पर राधा-कृष्ण की मूर्ति को स्थापित करें।
- फिर राधा-कृष्ण को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराकर उनको फल, फूल और माला पहनाकर श्रृंगार करें। 
- भगवान को गुलाल, पीला चंदन, अक्षत और भोग लगाकर उनके सामने दीपक और धूप जलाकर मंत्रों का जाप करें।
- अंत में आरती करते हुए पूजा में किसी भी तरह के भूल-चूक के लिए मांफी मांगे।  



रंग पंचमी पर मंत्रों का जाप
- ऊं क्लीं कृष्णाय नम:
- ऊं श्री कृष्णाय नम:

आरती कुंज बिहारी की....

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजन्ती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवन में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।।
नैनन बीच, बसहि उरबीच, सुरतिया रूप उजारी की ।। 
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़ै बनमाली, भ्रमर सी अलक।
कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छबि श्यामा प्यारी की।।
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।

कनकमय मोर मुकट बिलसे, देवता दरसन को तरसे।
गगनसों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग मधुर मिरदंग।।
ग्वालनी संग, अतुल रति गोप कुमारी की।।
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्री गंगै
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस जटाके बीच।
हरै अघ कीच, चरन छबि श्री बनवारी की।।
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।

चमकती उज्जवल तट रेनू, बज रही वृन्दावन बेनू।
चहुं दिसि गोपी ग्वाल धेनू, हसत मृदु मंद चांदनी चंद ।
कटत भव फंद, टेर सुनु दीन भिखारी की।।
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।
 
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