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Pradosh Vrat: रवि प्रदोष व्रत का क्या है महत्व और पूजा विधि

Sun, 05 Apr 2020 08:17 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 05 Apr 2020 08:17 AM IST
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pradosh vrat on 05 april know puja vidhi and importance
pradosh vrat
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। 5 अप्रैल, रविवार को रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। रविवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसको रवि प्रदोष व्रत कहते है।  प्रदोष का उपवास भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। प्रदोष व्रत माह में दो बार आता है एक शुक्ल पक्ष को और दूसरा कृष्ण पक्ष पर।
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अगर रविवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ता है और इस उपवास को रखा जाता है तो व्यक्ति सदा निरोगी बना रहता है। रविवार के दिन होने से इसका संबंध सूर्य से भी होता है। ऐसे में इस व्रत को रखने से कुंडली में सूर्य से संबंधित दोष दूर हो जाते हैं। इस व्रत को करने के लंबी आयु और दांपत्य जीवन सुखमय रहता है। प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से हर तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है।
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पूजा विधि
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत व्रत हिंदू चंद्रमास के 13वें दिन यानी त्रयोदशी तिथि पर आता है।  जो भी प्रदोष व्रत रखता है उसे दो गायों का दान करने के बराबर फल मिलता है। प्रदोष काल में किए जाने वाले नियम, व्रत एवं पूजन को प्रदोष व्रत या अनुष्ठान कहा गया है। 
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प्रदोष व्रत करने के लिए सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान करते हैं। इसके बाद भगवान शिव को बेल पत्र, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि चढ़ाए जाते हैं। इसके बाद भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की भी पूजा की जाती है।  प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए किया जाता है। इस दिन पूरे घर को गंगाजल से पवित्र करना चाहिए। प्रदोष व्रत को बाकी अन्य व्रतों से ज्यादा फल देने वाला बताया गया है। 
 
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