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Papankusha Ekadashi 2020: पापांकुशा एकादशी की इस कथा को सुनने से मिलता है व्रत का फल
Tue, 27 Oct 2020 07:13 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Tue, 27 Oct 2020 07:13 AM IST
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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा
- फोटो : सोशल मीडिया
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Papankusha Ekadashi 2020 Date: पापांकुशा एकादशी व्रत आज है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी पर भगवान पद्मनाभ की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से तप के समान फल की प्राप्ति होती है। लेकिन व्रत का फल व्रती को तभी प्राप्त होता है जब वह पापांकुशा एकादशी व्रत कथा को सुनता या फिर पढ़ता है। ये कथा इस प्रकार है -
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प्राचीन समय में क्रोधन नाम का एक क्रूर बहेलिया विंध्य पर्वत पर रहता था। उसने अपनी पूरी जिंदगी हिंसा, मद्यपान, लूट-पाट, झूठ, छल-कपट आदि बुरे कर्म करते हुए व्यतीत कर दी। जब अंतिम समय में यमराज ने अपने दूतों को क्रूर बहेलिया को लाने भेजा तब यमदूतों ने उसे बता दिया कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है।
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मृत्यु भय से क्रूर बहेलिया भयभीत हो गया और महर्षि अंगिरा के आश्रम में जा पहुंचा और उनकी शरण में दया मांगने लगा। महर्षि को बहेलिया दया आ गई और उन्होंने पापांकुशा एकादशी का व्रत करने को कहा। बहेलिया ने पूरी श्रद्धा भाव से इस एकादशी का व्रत किया।
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इससे बहेलिया के सभी पाप नष्ट हो गए और ईश्वर की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति हो गई। पापांकुशा एकादशी व्रत विधिनारदपुराण के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत करने पर वाला व्यक्ति मुहूर्त में स्नान आदि के बाद भगवान विष्णु को याद करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
इसके बाद घट स्थापना करें और उसके पर भगवान विष्णु की मूर्ति या प्रतिमा रखकर गंगाजल की छीटें दें। इसके बाद रोली-अक्षत लगाएं और सफेद फूल भगवान को अर्पित करें। फिर भगवान के समाने देसी घी का दीपक जलाकर उनकी आरती उतारें और भोग लगाएं।
इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए और कथा सुननी चाहिए। फिर दान करना चाहिए। इस व्रत में किसी एक समय फलाहार किया जाता है। व्रत के अगले दिन द्वादशी तिथि को गरीबों को भोजन व दान करना चाहिए और फिर व्रत खोलना चाहिए।