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Onam 2021 Date: ओणम का मुख्य पर्व आज, जानें क्यों मनाया जाता है यह त्योहार?

Sat, 21 Aug 2021 12:47 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Sat, 21 Aug 2021 12:47 PM IST
सार

  • इस साल ओणम का मुख्य पर्व 21 अगस्त को है। 
  • ओणम का त्योहार केरल राज्य का प्रमुख त्योहार है। 
  • यह त्योहार राजा बलि के स्वागत में मनाया जाता है।
  • ओणम में हर घर के आंगन में रंगोली बनायी जाती हैं। 

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onam 2021 date tithi kab hai onam festival significance
ओणम 2021 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज ( 21 अगस्त 2021) ओणम का मुख्य त्योहार मनाया जा रहा है। ओणम का यह त्योहार दक्षिण भारत में विशेषकर केरल राज्य में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार 10 दिनों तक चलता है जिसकी शुरुआत बीते 12 अगस्त से इसकी हुई थी। ओणम के दसवें दिन को थिरुवोनम के नाम से जाना जाता है और 23 अगस्त को इसका आखिरी दिन है। मलयालम कैलेंडर के अनुसार चिंगम माह में यह त्योहार मनाया जाता है जो कि प्रथम माह है। धार्मिक मान्यता है ओणम यानी थिरुओणम के दिन ही राजा महाबली अपनी समस्त प्रजा से मिलने के लिए आते हैं जिसकी खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है। इस पावन त्योहार को मनाने के लिए देश-विदेश तक के लोग आते हैं।

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दस दिनों तक चलता है यह त्योहार
यह त्योहार पूरे दस दिनों तक चलता है। इसके प्रथम दिन को उथ्रादम और दूसरे दिन को थीरुओणम कहा जाता है। यह उल्लास, उमंग और परंपराओं से भरा हुआ त्योहार है। किसान नए फसल के बेहतर उपज के लिए यह पर्व मनाते हैं। इस दिन केरल में प्रसिद्ध सर्प नौका दौड़ आयोजित की जाती है। इसके साथ इस दिन कथकली नृत्य के साथ इस पर्व का लुफ्त उठाया जाता है। 
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राजा बलि के स्वागत में मनाया जाता है ओणम
यह त्योहार महाबली राजा बलि के स्वागत में मनाया जाता है। राजा बलि असुराज होने पर भी भगवान विष्णु के भक्त थे। इस त्योहार की कथा भी विष्णु जी के वामन अवतार से जुड़ी है। मान्यता है कि साल में एक बार पाताल लोक से राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने धरती लोक पर आते हैं। इस दिन वामन अवतार और राजा बलि की पूजा के साथ उनका स्वागत किया जाता है। यह एक कृषि पर्व भी है। इस त्योहार को ऩई फसल उगने की खुशी में भी मनाया जाता है।
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रंगोली का विशेष महत्व
ओणम उत्सव की शुरुआत होते ही हर घर को सजाया जाता है। हर घर के आंगन में रंगोली बनायी जाती हैं। जिसे पूलकम कहा जाता है। पहले दिन यह रंगोली छोटी होती है, लेकिन हर दिन के साथ इस रंगोली में एक पंक्ति बड़ा दी जाती है। जिससे दसवें दिन इसका आकार बहुत बड़ा हो जाता है। इस त्योहार पर रंगोली के साथ दीप भी जलाए जाते हैं।


बनते हैं ये विशेष व्यंजन
ओणम पर साध्या थाली बनाने की परंपरा है। इस थाली में 26 तरह के शाकाहारी व्यंजन बनाए जाते हैं, जिन्हें क्रमबद्ध तरीके से केले के पत्तों पर परोसा जाता है। ओणम पर खास तौर पर चावल, नारियल के दूध और गुड़ डालकर खीर बनाई जाती है।

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