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Nirjala Ekadashi 2022 Date: निर्जला एकादशी कब करें 10 या 11 जून को ? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र
Sat, 11 Jun 2022 09:55 AM IST
विनोद शुक्ला
पं.मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य
पं.मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 11 Jun 2022 09:55 AM IST
सार
द्वादशी तिथि का क्षय होने के कारण 10 व 11 जून दोनों दिन एकादशी तिथि पहुंचने के कारण भक्तो में असमंजस की स्थिति है कि निर्जला एकादशी का व्रत कब करना चाहिए।
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Ekadashi Vrat 2022: दशमी मिश्रित एकादशी से तो पुण्य क्षीण होते हैं। इसलिए निर्जला एकादशी व्रत 11 जून,शनिवार को करना उत्तम व फलदायी रहेगा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
10 जून 2022 शुक्रवार को ज्येष्ठ शुक्ल दशमी प्रात: 7.27 बजे तक उपरांत एकादशी तिथि प्रारंभ होगी। 11 जून शनिवार को ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी प्रात:5.46 बजे तक पश्चात द्वादशी रात्रि 3.24 बजे तक उपरांत त्रयोदशी रहेगी। द्वादशी तिथि का क्षय होने के कारण 10 व 11 जून दोनों दिन एकादशी तिथि पहुंचने के कारण भक्तो में असमंजस की स्थिति है कि निर्जला एकादशी का व्रत कब करना चाहिए।
पद्मपुराण में एक प्रसंग है जब भगवान वाराह और हिरण्याक्ष का युद्ध हो रहा था तब भगवान नारायण के बार बार कोशिश करने पर भी जब हिरण्याक्ष नहीं मर रहा था,तब भगवान ब्रह्मा जी ने भगवान नारायण से पूछा हे प्रभु यह असुर तो आपकी दृष्टि मात्र से मरना चाहिए ऐसा क्यों हो रहा है कि आप इसे मार नहीं पा रहे हैं। तब भगवान जी बोले ब्रह्मा जी शुक्राचार्य की माया से मोहित होने से कुछ ब्राह्मण दशमी युक्ता एकादशी का व्रत कर रहे हैं। क्योंकि दशमी के दिन दैत्यों की उत्पत्ति हुई थी और एकादशी के दिन देवताओं की उत्पत्ति हुई थी इसीलिए दशमी को व्रत करने से दैत्यों का बल बढ़ता है और एकादशी को व्रत करने से देवताओं का बल बढ़ता है। ब्राह्मणों के दशमी विद्धा एकादशी का व्रत करने से दैत्य का बल बढ़ रहा है और यह मर नहीं रहा है। जो मनुष्य दशमी युक्ता एकादशी का व्रत करता है उसके अंदर आसुरी शक्ति बढ़ती है। कलियुग में सब लोग मोहित होकर दशमी विद्धा एकादशी का व्रत करेंगे इसीलिए दुनिया में अशांति बनी रहेगी।
जब सीताजी को लक्ष्मण जी वाल्मीकि ऋषि के आश्रम में छोड़ कर आए थे तब सीता जी ने वाल्मीकि ऋषि से पूछा कि हे ऋषिवर मैंने जीवन में कभी पाप नहीं किया। पतिव्रता रही पति की सेवा की फिर भी मेरे जीवन में इतने सारे कष्ट क्यों आए, तब बाल्मीकि जी ने सीता जी को जवाब दिया था कि आपने कभी पूर्व जन्म में दशमी विद्धा एकादशी का व्रत किया था उसी दिन भगवान की पूजा की थी उससे पुण्य नहीं पाप पड़े उसी का परिणाम है कि आपको यह कष्ट झेलना पड़ा।
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पुराणों में लिखा है कि दशमी विद्धा एकादशी का व्रत करने से धन और पुत्र का विनाश होता है। इस बार जून 10 को निर्जला एकादशी दशमी विद्धा अशुद्ध आसुरी शक्ति को बढ़ाने वाली है इसीलिए उस दिन एकादशी का व्रत शास्त्र सम्मत नहीं है।
पद्मपुराण में वर्णित है।
” वासरं दशमीविधं दैत्यानां पुष्टिवर्धनम।
मदीयं नास्ति सन्देह: सत्यं सत्यं पितामहः।।
” दशमी मिश्रित एकादशी दैत्यों के बल बढ़ाने वाली है इसमें कोई भी संदेह नही है।”
परविद्धा:- द्वादशी मिश्रित एकादशी को परविद्धा एकादशी कहते हैं।
” द्वादशी मिश्रिता ग्राह्य सर्वत्र एकादशी तिथि:
“द्वादशी मिश्रित एकादशी सर्वदा ही ग्रहण करने योग्य है।”
इसलिए भक्तों को परविद्धा एकादशी ही रखनी चाहिए। ऐसी एकादशी का पालन करने से भक्ति में वृद्धि होती है। दशमी मिश्रित एकादशी से तो पुण्य क्षीण होते हैं। इसलिए निर्जला एकादशी व्रत 11 जून,शनिवार को करना उत्तम व फलदायी रहेगा।
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पद्मपुराण में एक प्रसंग है जब भगवान वाराह और हिरण्याक्ष का युद्ध हो रहा था तब भगवान नारायण के बार बार कोशिश करने पर भी जब हिरण्याक्ष नहीं मर रहा था,तब भगवान ब्रह्मा जी ने भगवान नारायण से पूछा हे प्रभु यह असुर तो आपकी दृष्टि मात्र से मरना चाहिए ऐसा क्यों हो रहा है कि आप इसे मार नहीं पा रहे हैं। तब भगवान जी बोले ब्रह्मा जी शुक्राचार्य की माया से मोहित होने से कुछ ब्राह्मण दशमी युक्ता एकादशी का व्रत कर रहे हैं। क्योंकि दशमी के दिन दैत्यों की उत्पत्ति हुई थी और एकादशी के दिन देवताओं की उत्पत्ति हुई थी इसीलिए दशमी को व्रत करने से दैत्यों का बल बढ़ता है और एकादशी को व्रत करने से देवताओं का बल बढ़ता है। ब्राह्मणों के दशमी विद्धा एकादशी का व्रत करने से दैत्य का बल बढ़ रहा है और यह मर नहीं रहा है। जो मनुष्य दशमी युक्ता एकादशी का व्रत करता है उसके अंदर आसुरी शक्ति बढ़ती है। कलियुग में सब लोग मोहित होकर दशमी विद्धा एकादशी का व्रत करेंगे इसीलिए दुनिया में अशांति बनी रहेगी।
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जब सीताजी को लक्ष्मण जी वाल्मीकि ऋषि के आश्रम में छोड़ कर आए थे तब सीता जी ने वाल्मीकि ऋषि से पूछा कि हे ऋषिवर मैंने जीवन में कभी पाप नहीं किया। पतिव्रता रही पति की सेवा की फिर भी मेरे जीवन में इतने सारे कष्ट क्यों आए, तब बाल्मीकि जी ने सीता जी को जवाब दिया था कि आपने कभी पूर्व जन्म में दशमी विद्धा एकादशी का व्रत किया था उसी दिन भगवान की पूजा की थी उससे पुण्य नहीं पाप पड़े उसी का परिणाम है कि आपको यह कष्ट झेलना पड़ा।
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पुराणों में लिखा है कि दशमी विद्धा एकादशी का व्रत करने से धन और पुत्र का विनाश होता है। इस बार जून 10 को निर्जला एकादशी दशमी विद्धा अशुद्ध आसुरी शक्ति को बढ़ाने वाली है इसीलिए उस दिन एकादशी का व्रत शास्त्र सम्मत नहीं है।
पद्मपुराण में वर्णित है।
” वासरं दशमीविधं दैत्यानां पुष्टिवर्धनम।
मदीयं नास्ति सन्देह: सत्यं सत्यं पितामहः।।
” दशमी मिश्रित एकादशी दैत्यों के बल बढ़ाने वाली है इसमें कोई भी संदेह नही है।”
परविद्धा:- द्वादशी मिश्रित एकादशी को परविद्धा एकादशी कहते हैं।
” द्वादशी मिश्रिता ग्राह्य सर्वत्र एकादशी तिथि:
“द्वादशी मिश्रित एकादशी सर्वदा ही ग्रहण करने योग्य है।”
इसलिए भक्तों को परविद्धा एकादशी ही रखनी चाहिए। ऐसी एकादशी का पालन करने से भक्ति में वृद्धि होती है। दशमी मिश्रित एकादशी से तो पुण्य क्षीण होते हैं। इसलिए निर्जला एकादशी व्रत 11 जून,शनिवार को करना उत्तम व फलदायी रहेगा।