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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Navratri 9 Days for Nine Goddesses Worship With 9 Devi to Fulfill Your Desires

Navratri 2025: नवरात्रि के नौ दिन होती है नौ देवियों की पूजा, भक्तों को मिलता है अलग-अलग वरदान

Mon, 22 Sep 2025 06:04 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 22 Sep 2025 06:04 AM IST
सार

Navratri 2025: देवी भागवत और मार्कंडेय पुराण में वर्णित है कि देवी दुर्गा ही सृष्टि की सृजनकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। इन नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विधान है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है।

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Navratri 9 Days for Nine Goddesses Worship With 9 Devi to Fulfill Your Desires
शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Navratri 2025: शक्ति आराधना का महापर्व नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 22 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है, जो 01 अक्तूबर को महानवमी पर सिद्धिदात्री की पूजा-आराधना के साथ सम्पन्न हो जाएगा। नवरात्रि को शक्ति साधना का सबसे पवित्र पर्व माना गया है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि विशेष रूप से पूरे भारत में बड़े श्रद्धा भाव से मनाए जाते हैं। देवी भागवत और मार्कंडेय पुराण में वर्णित है कि देवी दुर्गा ही सृष्टि की सृजनकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। इन नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विधान है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष रूप की उपासना कर भक्त भिन्न-भिन्न फल और सिद्धियां प्राप्त करते हैं।

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प्रथम दिन-मां शैलपुत्री
नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की कन्या और वृषभ पर सवार इनका स्वरूप साधक को आत्मबल और स्थिरता प्रदान करता है।
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द्वितीय दिन- मां ब्रह्मचारिणी
दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की उपासना होती है। ये तपस्या और संयम की प्रतीक हैं। इनके पूजन से साधक में धैर्य, त्याग और ज्ञान की वृद्धि होती है।

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तृतीय दिन- मां चंद्रघंटा
तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र है और इनकी घंटा ध्वनि से असुरों का नाश होता है। इनकी उपासना से भय, शत्रु और विघ्न दूर होते हैं।


चतुर्थ दिन- मां कूष्मांडा
चौथे दिन कूष्मांडा देवी की पूजा की जाती है। इन्हें ब्रह्मांड सृष्टि की आदिशक्ति माना गया है। इनके पूजन से स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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पंचम दिन- मां स्कंदमाता
पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा होती है। कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें यह नाम मिला। इनकी कृपा से संतान सुख, परिवारिक सुख और उन्नति प्राप्त होती है।

षष्ठम दिन- मां कात्यायनी
छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना का महत्व है। ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण इन्हें यह नाम मिला। इनकी उपासना से विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं और इच्छित जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।



सप्तम दिन-मां कालरात्रि
सातवें दिन कालरात्रि की पूजा होती है। इनका रूप भयंकर अवश्य है, किंतु ये भक्तों के सभी भय दूर कर शुभ फल देती हैं। इनकी उपासना से नकारात्मक शक्तियाँ नष्ट होती हैं।

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अष्टम दिन- मां महागौरी
आठवें दिन महागौरी की उपासना होती है। इनका रंग अत्यंत गौर है और ये श्वेत वस्त्र धारण करती हैं। महागौरी की कृपा से जीवन के समस्त दुख और दरिद्रता दूर होती है।

नवम दिन- मां सिद्धिदात्री
नवरात्रि के अंतिम दिन सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। ये आठों सिद्धियाँ और नौों प्रकार की निधियाँ प्रदान करने वाली देवी हैं। इनकी कृपा से साधक के जीवन में सफलता और पूर्णता आती है।

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