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Narak Chaturdashi 2022: क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी? जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा
Sun, 23 Oct 2022 09:09 AM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Sun, 23 Oct 2022 09:09 AM IST
सार
Narak Chaturdashi 2022: कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाए जाने वाले पर्व को रूप चौदस, नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, नरक निवारण चतुर्दशी अथवा काली चौदस के रूप में भी जाना जाता है।
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क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Narak Chaturdashi 2022: कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाए जाने वाले पर्व को रूप चौदस, नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, नरक निवारण चतुर्दशी अथवा काली चौदस के रूप में भी जाना जाता है। इस साल नरक चतुर्दशी का पर्व 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। दीपावली के पांच दिनों के त्योहार में ये पर्व धनतेरस के बाद मनाया जाता है। लेकिन इस बार दिवाली और नरक चतुर्दशी एक ही दिन मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके यम तर्पण एवं शाम के समय दीप दान का बड़ा महत्व है। प्रत्येक पर्व को मनाने के पीछे कोई न कोई परंपरा जरूर जुड़ी होती है। ऐसे में चलिए जानते हैं नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है...
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भगवान श्री कृष्ण ने किया था नरकासुर का वध
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में नरकासुर राक्षस ने अपनी शक्तियों से देवताओं और ऋषि-मुनियों के साथ 16 हजार एक सौ सुंदर राजकुमारियों को भी बंधक बना लिया था। नरकासुर के अत्याचारों से त्रस्त देवता और साधु-संत भगवान श्री कृष्ण की शरण में गए। नरकासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था, इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध किया और उसकी कैद से 16 हजार एक सौ कन्याओं को आजाद कराया।
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कैद से आजाद करने के बाद समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए श्री कृष्ण ने इन सभी कन्याओं से विवाह कर लिया। नरकासुर से मुक्ति पाने की खुशी में देवगण व पृथ्वीवासी बहुत आनंदित हुए। इसी खुशी में उन्होंने ये पर्व मनाया। माना जाता है कि तभी से इस पर्व को मनाए जाने की परम्परा शुरू हुई।
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इस दिन क्यों लगाते हैं तेल और उबटन?
मान्यता है कि जब श्रीकृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था, तो वध करने के बाद उन्होंने तेल और उबटन से स्नान किया था। तभी से इस दिन तेल लगाकर स्नान की ये प्रथा शुरू हुई। माना जाता है कि ऐसा करने से नरक से मुक्ति मिलती है और स्वर्ग व सौंदर्य की प्राप्ति होती है। वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार नरकासुर के कब्जे में रहने के कारण सोलह हजार एक सौ कन्याओं के उदार रूप को फिर से कांति श्रीकृष्ण ने प्रदान की थी, इसलिए इस दिन महिलाएं तेल के उबटन से स्नान कर सोलह शृंगार करती हैं। माना जाता है कि नरक चतुर्दशी के दिन जो महिलाएं 16 श्रृंगार करती हैं, उन्हें सौभाग्यवती और सौंदर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।