हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी या रूप चौदस का त्योहार मनाया जा रहा है। पांच दिन के महापर्व में दिवाली के एक दिन पहले पड़ने वाला ये दूसरा पर्व है। इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन अलक्ष्मी को घर से बाहर भेजा जाता है क्योंकि दिवाली के पर्व के लिए मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां की जाती हैं। अलक्ष्मी को दुर्भाग्य की देवी कहा जाता है, ऐसी मान्यता है कि जहां भी ये होती हैं, वहां पर दरिद्रता का वास होता है, जिससे मनुष्य को धन की हानि का सामना करना पड़ता है। नरक चतुर्दशी तिथि को तीन ऐसे कार्य बताए गए हैं जिन्हें अवश्य करने चाहिए। इससे मां लक्ष्मी का आपके घर में आगमन होता है व सौंदर्य की प्राप्ति होने के साथ ही अकाल मृत्यु का भय भी नहीं रहता है। तो चलिए जानते हैं कौन से हैं वे कार्य।
Narak chaturdashi 2021: आज रूप चौदस पर जरूर कर लें ये तीन काम, होती है सौंदर्य और लक्ष्मी की प्राप्ति
नरक चतुर्दशी के अगले दिन यानी दिवाली पर मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। इसलिए नरक चौदस के दिन अपने घर की अच्छे से साफ सफाई करनी चाहिए और सारा फालतू सामान जैसे टूटा-फूटा सामान, बेकार जूते, फटे-पुराने कपड़े आदि को घर से बाहर निकाल देना चाहिए। इसी के साथ घर के हर कोने की अच्छी तरह से साफ-सफाई करने के बाद घर के अंधेरे स्थानों पर रोशनी कर देना चाहिए। ताकि मां लक्ष्मी के आगमन के लिए आपके घर का वातावरण पूरी तरह से शुद्ध हो।
नरक चतुर्दशी के दिन शरीर पर तिल के तेल और उबटन लगाने का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन प्रातः काल जल्दी उठकर शरीर पर अच्छी तरह तिल का तेल और उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन यदि उबटन लगाया जाए या शरीर पर तेल से मालिश करके स्नान किया जाए तो सौंदर्य की प्राप्ति होती है।
नरक चतुर्दशी को रात्रि के समय यम के निमित्त दीपदान करने का विधान है इसलिए रात में दक्षिण दिशा की ओर यम के नाम का दीप अवश्य प्रज्वलित करना चाहिए। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर यम के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस दीपक को जलाने के बाद निगरानी करना आवश्यक होता है। जब दीप की लौ बढ़ जाए तो दीपक को उठाकर घर में लें आएं और संभालकर रख दें।