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Nag Panchami Katha: जानिए कालसर्प दोष से मुक्ति दिलाने वाले पर्व नाग पंचमी की कथा और पूजन विधि

Tue, 29 Jul 2025 06:22 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 29 Jul 2025 06:22 AM IST
सार

Nag panchami Katha in Hindi: नाग पंचमी के दिन नागों की विशेष रूप से पूजा होती है। नाग पंचमी केवल नागों की पूजा का ही नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का भी श्रेष्ठ अवसर है। आइए जानते हैं नाग पंचमी की क्या है कथा। 

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Nag Panchami 2025 Vrat Katha In Hindi Nag Panchami Ki Kahaani Story in Hindi
Nag Panchami 2025 - फोटो : adobe stock

विस्तार

Nag panchami Katha in Hindi: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा और आस्था से मनाया जाता है। शास्त्रों में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि पंचमी तिथि के अधिष्ठाता देव नागराज माने गए हैं। इस दिन नागों की पूजा, व्रत तथा कथा-पाठ करने से कालसर्प दोष का निवारण होता है, भय समाप्त होता है और परिवार की रक्षा होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन नाग देवता का स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने से वे प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं।
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1. पूजन विधि
नाग पंचमी पर घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर गोबर अथवा गेरू से आठ नागों की आकृति बनाई जाती है। फिर इन पर हल्दी, रोली, अक्षत (चावल), फूल, घी, कच्चा दूध एवं जल अर्पित करके पूजा की जाती है। इस दिन एक दिन पूर्व बनाए गए शुद्ध भोजन का भोग लगाना शुभ माना गया है। शिवालयों में भगवान शिव के गले की शोभा बढ़ाने वाले तांबे अथवा चांदी के नाग की भी विशेष पूजा होती है। पूजा के पश्चात नाग देवता की आरती की जाती है और विधिवत कथा का पाठ किया जाता है।
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2. नागों को दूध अर्पण का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि नाग पंचमी के दिन सर्पों को दूध अर्पित करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह भी मान्यता है कि ऐसा करने से नाग देवता संतुष्ट होते हैं और व्यक्ति को जीवन में भय, रोग और शत्रुओं से रक्षा मिलती है। नागों की कृपा से धन-धान्य और समृद्धि का वास घर में होता है। इस दिन शिव पूजा और रुद्राभिषेक का भी विशेष महत्व बताया गया है, जिससे सभी दोष दूर होते हैं।
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3. अष्टनागों का ध्यान और आराधना
नाग पंचमी के दिन अष्टनागोंअनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख का ध्यान कर उनकी पूजा की जाती है। इन्हीं नागों का स्मरण कर उन्हें पुष्प, चंदन, जल और दूध अर्पित किया जाता है। पूजा के अंत में नाग देवता से यह प्रार्थना की जाती है कि वे परिवार की रक्षा करें, घर में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखें तथा किसी प्रकार का नागदोष या सर्पदंश न हो।

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4. पौराणिक कथा: नाग यज्ञ और आस्तिक मुनि
महाभारतकालीन पौराणिक कथा के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के काटने से हुई थी। इसके प्रतिशोध में उनके पुत्र जन्मेजय ने नागों के विनाश के लिए एक महायज्ञ आरंभ किया। यज्ञ की अग्नि में सभी नाग गिरने लगे, तब ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तिक मुनि ने इस यज्ञ को रोका। उन्होंने सावन शुक्ल पंचमी के दिन नागों को बचाया और उनके जलते शरीर पर दूध की धार डालकर उन्हें शीतलता दी। नागों ने आशीर्वाद दिया कि इस तिथि को जो मेरी पूजा करेगा, उसे सर्प भय नहीं होगा। तभी से यह पर्व नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।

5. शिव पूजन और रुद्राभिषेक का महत्व
नाग पंचमी केवल नागों की पूजा का ही नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का भी श्रेष्ठ अवसर है। इस दिन रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं। शिव के गले में नाग का वास होता है, इसलिए शिव और नाग पूजन को एक साथ करना विशेष फलदायक माना गया है। भक्तों को इस दिन विशेष मंत्रों का जाप, दूध एवं बेलपत्र से अभिषेक, और नाग देवता की आराधना करनी चाहिए।



 
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