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Nag Panchami 2020: कहीं कुल देवता तो कहीं ग्राम देवता के रूप में पूजे जाते हैं नाग, जानिए मान्यताएं

Sat, 25 Jul 2020 12:08 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 25 Jul 2020 12:08 AM IST
सार

  • भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं।
  • भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग के आतंक से गोकुल वासियों की रक्षा की थी।
  • भगवान शिव गले में नागों का आभूषण धारण करते हैं।
  •  नागों को पूर्वजों की आत्मा के रूप में माना जाता है।

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nag panchami 2020 date puja vidhi importance of nag puja and facts about nag devta
nag panchami 2020: नाग पंचमी पर भगवान शिव और नाग देवता दोनों की पूजा की जाती है।

विस्तार

25 जुलाई, शनिवार को सावन महीने का पवित्र त्योहार नाग पंचमी है। हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। नाग पंचमी पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस पर्व पर भगवान शिव और नाग देवता दोनों की पूजा की जाती है। हिंदू मान्यताओं में नागों का महत्व काफी पुराने से समय चलता आ रहा है। इस नाग पंचमी के अवसर पर आइए जानते हैं नागों से जुड़ी कई तरह की मान्यताएं...
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कालसर्प दोष और नाग पंचमी त्योहार
ज्योतिष में कालसर्प दोष को अशुभ माना जाता है। कालसर्प दोष राहु-केतु के कारण बनता है जिसे एक अशुभ ग्रह माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है उन्हें नाग पंचमी के दिन कालसर्प दोष निवारण पूजा जरूर करना चाहिए।
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पूजा में नाग देवता का महत्व
पुराणों में सभी सभी तरह के नागों में नाग वासुकि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। तभी तो भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं सर्पाणामस्मिवासुकि यानी सर्पों में मैं वासुकि हूं। शास्त्रों मे बताया गया है कि कुल 33 कोटि के देवी-देवता होते हैं जिनमें नाग भी शामिल है। नाग को कुल देवता, ग्राम देवता और क्षेत्रपाल भी कहते हैं। जिस प्रकार से कुल देवता में देवी-देवताओं शामिल होते हैं उसी प्रकार अलग-अलग क्षेत्रों में इन्हें स्थान देवता माना जाता है। देश का कई हिस्सों में नाग देवता के कई प्राचीन मंदिर है। जिनका संबंध नागों से है। नागालैंड को नागवंशियों का मुख्य स्थान माना गया है। इसके अलावा देश के कई जगहों का नाम नाग देवता पर रखा गया है। जिनमें नागपुर, उरगापुर, नागारखंड, नागवनी, अनंतनाग, शेषनाग, नागालैंड और भागसूनाग आदि।


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नागों के प्रकार
पुराणों में कुल आठ तरह के नागों का वर्णन मिलता है। जिनके नाम इस प्रकार है-शेष, वासुकि, कंबल, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख, कुलिक नाम के नाग प्रमुख है। इनमें नाग वासुकि को सर्वश्रेष्ठ नाग माना गया है।

नाग को उत्पत्ति कैसे हुई
वराहपुराण के अनुसार, महर्षि कश्यप का विवाह दक्ष की पुत्री कद्रु से हुआ था। कद्रू ने अपने पति महर्षि कश्यप की बहुत सेवा की, जिससे प्रसन्न होकर महर्षि ने कद्रू को वरदाने मांगने के लिए कहा। कद्रू ने कहा कि एक हजार तेजस्वी नाग मेरे पुत्र हों। महर्षि कश्यप ने वरदान दे दिया, उसी के फलस्वरूप नाग वंश की उत्पत्ति हुई। धीरे-धीरे इन नागों ने लोगों को डंसना शुरू कर दिया। तब सभी ने मिलकर ब्रह्रााजी से प्रार्थना की इन विशाल नागों से हमारी रक्षा करें। इसके बाद ब्रह्माजी ने सभी नागों को शाप देते हुआ कहा कि तुम जिस प्रकार से लोगों पर अत्याचार कर रहे हों अगले जन्म में तुम सभी का नाश  हो जाएगा।  तब सभी नागों ने मिलकर ब्रह्माजी से प्रार्थना की आप जिस प्रकार से मनुष्यों के रहने के लिए आपने पृथ्वी को दिया है उस तरह से आप भी हमें एक अलग स्थान दें। तब ब्रह्माजी ने सभी नागों से कहा मैं तुम सभी को रहने के लिए पाताल देता हूं। अब से तुम सभी भूमि के अंदर ही रहोगे। इसके बाद सभी नाग पाताल लोग में निवास करने चले गए और वहीं रहने लगे। जिस दिन ब्रह्राजी ने नागों से मनुष्यों की रक्षा करते हुए उनके रहने की अलग वयवस्था की उस दिन सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। तभी से इस तिथि पर लोग नागों की पूजा करने लगे।

पुराणों में नाग
-  भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं।
- भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग के आतंक से गोकुल वासियों की रक्षा की थी।
- भगवान शिव गले में नागों का आभूषण धारण करते हैं।
- नागों को पूर्वजों की आत्मा के रूप में माना जाता है।
- भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम शेषनाग के अवतार माने गए हैं।
- वासुकि नाग को सर्वश्रेष्ठ नाग माना जाता है।
- समुद्र मंथन के दौरान वासुकि नाग को ही रस्सी की तरह देवताओं और दानवों ने इस्तेमाल किया था।
- कई जगहों पर वासुकि नाग को समुद्र का देवता माना जाता है।
- अर्जुन का विवाह नाग कन्या उलुपी से हुआ था।
 
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